बुधवार को खत्म होगा अगहन कृष्ण पक्ष:अमावस्या तिथि के स्वामी हैं पितर देवता, इस दिन सूर्य-चंद्र रहते हैं एक राशि में

6 दिन पहले
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बुधवार, 23 नवंबर को अगहन मास की अमावस्या है और इस दिन अगहन मास का कृष्ण पक्ष खत्म होगा। अगले दिन यानी 24 तारीख से इस महीने का शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा। अमावस्या के स्वामी पितर देवता माने गए हैं, इसलिए इस तिथि पर पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं कि हिन्दी पंचांग के एक माह में 15-15 तिथियों के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। कृष्ण पक्ष में चंद्र की कलाएं घटती हैं और अमावस्या पर चंद्र पूरी तरह से दिखाई नहीं देता है। शुक्ल पक्ष में चंद्र की कलाएं बढ़ती हैं यानी चंद्र बढ़ता है और पूर्णिमा पर चंद्र पूरे आकार में दिखता है।

चंद्र की सोलहवीं कला है अमा

चंद्र की कुल सोलह कलाएं होती हैं और सोलहवीं कला का नाम है अमा। ये कला अमावस्या पर रहती है। ऐसा माना जाता है कि अमा कला में चंद्र की अन्य सभी 15 कलाओं की शक्तियां होती हैं और इस कला का क्षय नहीं होता है।

अमावस्या पर सूर्य-चंद्र रहते हैं एक राशि में

अमावस्या का संबंध चंद्र के साथ ही सूर्य से भी है। इस तिथि पर सूर्य और चंद्र एक साथ एक ही राशि में स्थित होते हैं। 23 नवंबर को ये दोनों ग्रह वृश्चिक राशि में रहेंगे। इस दिन चंद्र के साथ ही सूर्य देव की भी विशेष पूजा जरूर करें। सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत करें। शिव जी के साथ ही भगवान के मस्तक पर विराजित चंद्र की पूजा करें।

बुधवार को कर सकते हैं ये शुभ काम भी

पितर देवता अमावस्या के स्वामी हैं। इसलिए बुधवार को पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म और धूप-ध्यान करें। जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य करें।

अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं तो इस शुभ दिन पुण्य लाभ कमा सकते हैं। अगर नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

अमावस्या पर सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।

किसी शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में जल भरकर अभिषेक करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। चंद्र देव को दूध अर्पित करें और ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।