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10 जून को सूर्य ग्रहण:भारत के अधिकतर क्षेत्रों में नहीं दिखेगा ग्रहण, जहां ग्रहण नहीं दिखेगा, वहां नहीं रहेगा सूतक

4 दिन पहले
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  • अमावस्या पर नदी में स्नान करने की और दान-पुण्य करने की है परंपरा

गुरुवार, 10 जून को ज्येष्ठ मास की अमावस्या है। इस दिन सूर्य ग्रहण भी हो रहा है, लेकिन ये ग्रहण भारत के अधिकतर क्षेत्रों में नहीं दिखेगा। ये ग्रहण लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में दिखेगा। जहां ग्रहण नहीं दिखेगा, वहां सूतक नहीं रहेगा। अमावस्या से जुड़े पुण्य कर्म किए जा सकेंगे।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण जरूर करें। किसी नदी में स्नान करें और दान-पुण्य करें। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

अमावस्या पर छाते का, अनाज का दान करें। गुरुवार और अमावस्या के योग में भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें।

ज्येष्ठ अमावस्या पर वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करने की विशेष परंपरा है। इस तिथि पर महिलाएं अपनी पति के सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वट की पूजा करती हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं।

अमावस्या पर शिवलिंग का अभिषेक करें। दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर पंचामृत बनाएं और शिवलिंग पर चढ़ाएं। तांबे के लोटे से जल चढ़ाकर बिल्व पत्र और धतूरा चढ़ाएं। शिवलिंग पर चंदन से तिलक करें। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

भोपाल की विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार ये ग्रहण कनाडा, ग्रीनलैंड में वलयाकार दिखाई देगा। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग, यूरोप और एशिया के कुछ देशों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखेगा। भारत में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में ये ग्रहण दिखेगा। यह घटना भारतीय समयानुसार दोपहर 1.42 बजे शुरू होगी और शाम 6.41 बजे खत्म होगी। ये इस साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण के समय चंद्र पृथ्वी और सूर्य के बीच एक सीधी रेखा में आ जाता है। सूर्य ग्रहण चार प्रकार के होते हैं- पूर्ण सूर्य ग्रहण, वलयाकार सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण, हाइब्रिड सूर्य ग्रहण।