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मकर संक्रांति से पहले सूर्य पर्व:9 जनवरी को रविवार और पौष सप्तमी का शुभ संयोग, इस दिन सूर्य पूजा से बढ़ती है उम्र

5 महीने पहले
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रविवार, 9 जनवरी को पौष महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी है। पुराणों में इसे भानू सप्तमी कहा गया है। इस दिन सूर्य पूजा और व्रत करने से बीमारियां खत्म होने लगती हैं और उम्र भी बढ़ती है। ये दिन मकर संक्रांति से पहले सूर्य पूजा का पर्व है। इस दिन पवित्र नदियों में नहाने और जरूरतमंद लोगों को दान देने का विशेष महत्व है। इस पर्व पर किसी नदी में नहा न पाएं तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। ऐसा करने से भी नदी में स्नान करने के बराबर पुण्य मिल सकता है। स्नान के बाद सूर्य मंत्रों का जाप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए।

पुराणों के मुताबिक आसान सूर्य पूजा
भानू सप्तमी पर सूर्योदय से पहले उठें। पानी में लाल चंदन और तिल डालकर नहाएं। इसके बाद उगते हुए सूरज को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। उस लोटे में लाल फूल, लाल चंदन और चावल डालें। फिर सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते वक्त ऊँ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। फिर सूर्य को प्रणाम करें।

सेहतमंद भी है सूर्य पूजा
सूर्यदेव पंचदेवों में से एक हैं। रोज सुबह नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा है। ऐसा करने से पाप खत्म होते हैं। पुण्य मिलता है। साथ ही सेहत में भी फायदा होता है। सूर्य को जल चढ़ाने से त्वचा की चमक बढ़ती है। आलस्य दूर होता है और आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

श्रीकृष्ण और हनुमानजी ने की सूर्य पूजा
भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य की महिमा बताई है। श्रीकृष्ण ने कहा कि सूर्यदेव एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्यदेव की पूजा करता है, उसे अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही सौभाग्य मिलता है। सूर्य, हनुमानजी के गुरु हैं। सूर्य पूजा से ही उन्हें दिव्य ज्ञान मिला।

भानू सप्तमी पर दान
पौष महीने की सप्तमी पर तांबे का बर्तन, लाल या ऊनी कपड़े, गेहूं, गुड़, और लाल चंदन का दान किया जा सकता है। इनके अलावा तिल और जरूरतमंद लोगों को अन्नदान कर सकते हैं। ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए। लोगों को जूते-चप्पल का दान भी किया जा सकता है।

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