वृष संक्रांति और रविवार का योग:15 मई को सूर्य करेगा वृष राशि में प्रवेश, दान-पुण्य के साथ ही सूर्य को अर्घ्य देते समय करें 12 मंत्रों का जप

12 दिन पहले
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रविवार 15 मई को सूर्य मेष से वृष राशि में प्रवेश कर रहा है। इसे वृष संक्रांति कहते हैं। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उस दिन का पर्व की तरह महत्व माना जाता है। एक साल में 12 संक्रांतियां आती हैं। संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें और इस समय में सूर्य के 12 नाम मंत्रों का जप करना चाहिए। ज्योतिष में सूर्य को नौ ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य पंचदेवों में से एक हैं। सूर्य हनुमान जी के गुरु भी हैं। हर शुभ काम की शुरुआत में सूर्यदेव की भी विशेष पूजा जरूर की जाती है। जो लोग हर रोज सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता, सुख-शांति के साथ ही मान-सम्मान भी मिलता है।

अगर किसी व्यक्ति की की कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति ठीक नहीं है तो उसे रोज सूर्य को जल जरूर चढ़ाना चाहिए। सूर्य को जल चढा़ने से आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। एकाग्रता बनी रहती है।

धर्म लाभ के साथ ही इस शुभ काम से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। सुबह-सुबह सूर्य की किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं। किरणों से विटामीन डी मिलता है। इसीलिए सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

वृष संक्रांति पर इस तरह करें पूजा

सुबह स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए। ध्यान रखें स्टील या लोहे के लोटे से जल न चढ़ाएं। तांबा सूर्य की धातु है। इसलिए तांबे के लोटे को प्राथमिकता दें। लोटे में पानी भरें, चावल, रोली, फूल पत्तियां भी डाल लें। इसके बाद जल चढ़ाते समय सूर्य के 12 नाम वाले मंत्र का जाप करें।

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर, दिवाकर नमस्तुभ्यं, प्रभाकर नमोस्तुते।

सप्ताश्वरथमारूढ़ं प्रचंडं कश्यपात्मजम्, श्वेतपद्यधरं देव तं सूर्यप्रणाम्यहम्।।

सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की जो धारा जमीन पर गिरती है, उस धारा से सूर्य देव के दर्शन करना चाहिए। सूर्य को सीधे नहीं देखना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद जमीन पर गिरे पानी को अपने सिर पर लगाना चाहिए।