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मकर संक्रांति 14 को:सूर्य की संतान हैं यमराज, यमुना और शनिदेव; शनि अपने पिता को मानते हैं शत्रु, सूर्य के सात घोड़े सात दिनों के प्रतीक

12 दिन पहले
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  • सूर्य ग्रह के दोष दूर करने के लिए मकर संक्रांति पर गुड़ का दान करें और सूर्य मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें

गुरुवार, 14 जनवरी को मकर संक्रांति है और सूर्य भी उत्तरायण हो रहा है। ये सूर्य पूजा का महापर्व है। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। विज्ञान की मान्यता है कि सभी नौ ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य की वजह से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। ग्रंथों में शिवजी, गणेशजी, विष्णुजी, देवी दुर्गा और सूर्य ये पंचदेव बताए गए हैं। इन पांचों की पूजा रोज करने की परंपरा है। सूर्य एक मात्र साक्षात दिखाई देने वाले देवता हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जब सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। ये समय दो ऋतुओं के संधिकाल है। इसी वजह से इन दिनों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। मकर संक्रांति से खान-पान में बदलाव आने लगता है। इस तिल-गुड़ का सेवन करने से मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति शरीर को मिलती है।​​​​​​​

जानिए सूर्य ग्रह से जुड़ी कुछ खास बातें...​​​​​​​

सूर्यदेव का विवाह संज्ञा नाम की देव कन्या से हुआ था। यमराज और यमुना इनकी संतान हैं। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थीं, तब उन्होंने अपनी छाया को सूर्यदेव की सेवा में लगा दिया। शनिदेव सूर्य और छाया की संतान हैं। छाया की संतान होने की वजह से शनि का रंग काला है।

ज्योतिष की मान्यता है कि शनि अपने पिता सूर्य से शत्रुता रखते हैं। लेकिन, सूर्य शनि के साथ समभाव रखते हैं यानी सूर्य शनि को शत्रु नहीं मानते।

सूर्य सात घोड़ों के रथ पर सवार रहते हैं। वे कभी रुकते नहीं हैं। रथ के 7 घोड़े सप्ताह के 7 दिनों के प्रतीक हैं। गरुड़देव के भाई अरुण सूर्य के सारथी हैं।

सूर्य की पूजा में ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिनकराय नम: आदि मंत्रों का जाप किया जाता है। अपनी इच्छा के अनुसार किसी एक मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करते हुए भी सूर्य की पूजा की जा सकती है।

ग्रंथों के अनुसार त्रेतायुग में सुग्रीव का जन्म सूर्यदेव के अंश से हुआ था। द्वापर युग में सूर्य देव ने कुंती को एक पुत्र दिया था, जिसे कर्ण के नाम से जाना जाता है। हनुमानजी ने सूर्य को अपना गुरु बनाया था। सूर्य से ही उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया था।

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