पितरों की आराधना के दिन:तर्पण, पिंडदान और पंचबलि को ही कहते हैं श्राद्ध, इसके लिए देश में है 7 पवित्र पितृ तीर्थ

22 दिन पहले
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  • ब्रह्म पुराण और महर्षि पराशर का कहना है कि पितरों के उद्देश्य से जो ब्राह्मणों को दिया जाए वही श्राद्ध है

ग्रंथों में 7 ऐसी जगहों का जिक्र किया गया है, जहां श्राद्ध करने से पितृ पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं हो, शारीरिक या आर्थिक परेशानी हो तो ऐसी दशा में मन पर बोझ ना रखते हुए भी ये काम श्राद्धानुसार किया जा सकता है। देश, काल, परिस्थिति को ध्यान में रखकर कहीं भी श्राद्ध हो सकता है। इस बारे में ब्रह्म पुराण के साथ ही महर्षि पराशर कहते हैं कि पितरों के उद्देश्य से जो ब्राह्मणों को दिया जाए वही श्राद्ध है। श्राद्ध को तीन भागों में बांटा गया है, नित्य, नैमित्तिक, काम्य लेकिन भविष्यपुराण में 12 तरह के श्राद्ध बताए गए हैं।

वेद और पुराणों में श्राद्ध
श्रद्धा शब्द से श्राद्ध शब्द बना है। ग्रंथों में कहा गया है कि श्रद्धार्थमिदं श्राद्धम् यानि पितृगणों के लिए विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक किया गया कर्म विशेष ही श्राद्ध है। इस बारे में अथर्ववेद, वायु, पद्म और कूर्म पुराण सहित कई ग्रंथों में उल्लेख मिलता है।

देश के 7 पवित्र पितृ तीर्थ
1. गया (बिहार) यह फल्गु नदी के तट पर बसा है। इस तीर्थ का वर्णन रामायण में भी मिलता है।
2. ब्रह्मकपाल (उत्तराखंड) यह स्थान बद्रीनाथ के निकट ही है। ब्रह्मकपाल में श्राद्ध कर्म सेे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त होती हैं व उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। 3. सिद्धनाथ (मध्य प्रदेश) उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है सिद्धनाथ तीर्थ।
4. प्रयाग (उत्तर प्रदेश) जिस किसी भी व्यक्ति का तर्पण एवं अन्य श्राद्ध कर्म यहां विधि-विधान से संपन्न हो वे जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।
5. मेघंकर (महाराष्ट्र) मान्यताओं के अनुसार मेघंकर तीर्थ को साक्षात भगवान जर्नादन का स्वरूप माना गया है।
6. लक्ष्मण बाण (कर्नाटक) माना जाता है कि यहां श्रीराम ने अपने पिता का श्राद्ध किया था।
7. लोहार्गल (राजस्थान) लोहार्गल वह स्थान है जिसकी रक्षा स्वयं ब्रह्मा जी करते हैं।

तर्पण में रखें ख्याल
तर्पण में दूध, तिल, कुशा, पुष्प, गंध मिश्रित जल से पितरों को तृप्त किया जाता है। श्राद्ध का फल, दक्षिणा देने पर ही मिलता है। मान्यता है कि चंद्रलोक पर और सूर्यलोक के पास पितृलोक होने से, वहां पानी की कमी है। अत: पूर्वजों का तर्पण, हर पूर्णिमा और अमावस्या पर करें।

श्राद्ध में जरूरी बातें
स्वच्छ वस्त्र पहनकर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध व दान का संकल्प लें। श्राद्ध में पूजा-पाठ की सामग्री के अलावा तर्पण के लिए खासतौर से साफ बर्तन, जौ, तिल, चावल, कुशा घास, दूध और पानी की जरूरत होती है। पिंडदान के लिए तर्पण चावल और उड़द का आटा जरूरी है। ब्राह्मण भोजन के लिए सात्विक भोजन बने। वस्त्रदान से पितरों तक वस्त्र पहुंचाए जाता है। श्राद्ध होने तक कुछ न खाएं।

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