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तीज-त्योहारों की शुरुआत:देवशयनी एकादशी आज; 24 को गुरु पूर्णिमा और 26 जुलाई को पहला सावन सोमवार

15 दिन पहले
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  • 25 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इस बार श्रावण में शिव पूजा के लिए खास रहेंगे 8 दिन

आज देवशयनी एकादशी से ही महत्त्वपूर्ण पर्वों का सिलसिला शुरू हो रहा है। इनमें आज से चामुर्मास की शुरुआत, 21 को वामन द्वादशी, 22 को तीज पूजा, 23 को आषाढ़ी पूर्णिमा, 24 को गुरु पूर्णिमा और 25 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत होगी।

इस बार सावन महीने में 4 सोमवार के साथ 2 प्रदोष और मासिक शिवरात्रि व्रत भी रहेगा। ये शिव भक्तों के लिए शुभ संकेत भी है। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस मान्यता के कारण लगभग चार महीने बाद देवउठनी एकादशी (15 नवंबर) तक सभी मांगलिक काम नहीं होंगे, लेकिन जप, तप, दान, व्रत, हवन आदि जारी रहेंगे।

गुरु पूर्णिमा: मानसिक पूजा कर मना सकते हैं पर्व
गुरु पूर्णिमा पर्व 24 जुलाई को मनाया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण इस बार कई जगहों पर गुरु और शिष्यों के बीच दूरी रहेगी। ऐसे में गुरु के चित्र की पूजा, मानसिक नमस्कार और संचार साधनों की मदद से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाना चाहिए। गुरु पूर्णिमा के साथ ही चातुर्मास के अनुष्ठानों का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। गुरु पूजा के अगले ही दिन से शिव आराधना शुरू हो जाती है।

सावन में चार सोमवार और दो प्रदोष व्रत
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि सावन में चार सोमवार और दो प्रदोष व्रत रहेंगे। इसके अलावा कई विशेष शुभ योग भी आएंगे। ऐसी मान्यता है कि इस माह में किए गए सोमवार के व्रत का फल बहुत जल्दी मिलता है। लेकिन महामारी के संक्रमण से बचने के लिए घर पर ही भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। डॉ. मिश्र का कहना है कि घर पर की गई पूजा का फल मंदिर में की गई पूजा के बराबर ही मिलता है। इसलिए घर में उपलब्ध चीजों से ही पूजा करनी चाहिए।

सावन में शिव पूजा के 8 खास दिन
पहला सोमवार: 26 जुलाई
दूसरा सोमवार: 02 अगस्त
तीसरा सोमवार: 09 अगस्त
चौथा सोमवार: 16 अगस्त
प्रदोष व्रत: सावन में 5 अगस्त व 20 अगस्त को प्रदोष व्रत रहेगा।
चतुर्दशी तिथि: 7 और 21 अगस्त को रहेगी। इस तिथि के स्वामी खुद शिवजी हैं।

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