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10 अवतारों की खास बातें:विष्णुजी के आठवें अवतार हैं श्रीकृष्ण, जब पृथ्वी जलमग्न हो गई थी, तब हुआ था मत्स्य अवतार, कलियुग के अंत में होगा कल्कि अवतार

2 महीने पहले
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  • जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं

बुधवार, 12 अगस्त को विष्णुजी आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। कुछ क्षेत्रों में 11 अगस्त को ये पर्व मनाया जाएगा। श्रीमद् भागवत में श्रीकृष्ण ने कहा है कि जब-जब इस धरती पर धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ने लगता है, तब-तब वे अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार विष्णु पुराण में भगवान के 10 मुख्य अवतार बताए गए हैं। जानिए विष्णुजी के सभी 10 अवतारों की खास बातें...

मत्स्य अवतार

प्राचीन समय में असुर हयग्रीव का आतंक बढ़ गया था और पूरी पृथ्वी जल मग्न हो गई थी। तब मछली के रूप में श्रीहरि का पहला मत्स्य अवतार हुआ था। विष्णुजी ने मछली के रूप में हयग्रीव का वध किया और पृथ्वी को जल से निकाला था।

कूर्म अवतार

देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। उस समय विष्णुजी ने कूर्म यानी कछुए के रूप में अवतार लिया था। कूर्म अवतार ने मंदार पर्वत अपने कवच पर धारण किया था। इसके बाद देवता और असुरों ने समुद्र को मथा था।

वराह अवतार

प्राचीन काल में हिरण्याक्ष नाम के एक दैत्य ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। उस समय भगवान विष्णु ने वराह के रूप में अवतार लिया और हिरण्याक्ष का वध किया। पृथ्वी समुद्र से बाहर निकाला।

नृसिंह अवतार

हिरण्यकश्यप नाम के असुर का पुत्र था प्रहलाद। जिसे भक्त प्रहलाद के नाम से जाना जाता है। प्रहलाद की रक्षा के लिए विष्णुजी ने नृसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था।

वामन अवतार

असुरों के राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए विष्णुजी ने वामन अवतार लिया था। बलि ने वामनदेव को तीन पग जमीन देने का वचन दिया था। वामनदेव ने एक पग में धरती और दूसरे पग में स्वर्ग नाप लिया था। तब बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखवा लिया तो वह पाताल में पहुंच गया था।

परशुराम अवतार

विष्णुजी ने परशुराम के रूप में अवतार लिया था। उस समय हैहयवंशी क्षत्रियों के वंश का नाश किया था। परशुराम ने राजा सहस्त्रार्जुन का वध किया था।

श्रीराम अवतार

त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में विष्णुजी ने अवतार लिया था। उस रावण का आतंक था। श्रीराम ने रावण का वध किया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी।

श्रीकृष्ण अवतार

द्वापर युग में कंस और दुर्योधन जैसे अधर्मियों का आतंक बढ़ गया था। उस समय श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। पांडवों से दुर्योधन के कौरव वंश का अंत करवाया और धर्म की स्थापना की।

बुद्ध अवतार

भगवान बुद्ध को विष्णुजी का नवां अवतार माना गया है। गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने समाज को हिंसा से दूर रहने का उपदेश दिया था।

कल्कि अवतार

भगवान विष्णु का दसवां अवतार कल्कि है। ये अभी प्रकट नहीं हुआ है, लेकिन कलियुग के अंत में जब अधर्म काफी बढ़ जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में प्रकट होंगे और धर्म की स्थापना करेंगे।

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