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तीज-त्योहार का कैलेंडर:दिसंबर में होगा साल का आखिरी ग्रहण, इस महीने रहेंगे विवाह पंचमी और गीता जयंती समेत कई पर्व

2 महीने पहले
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  • 4 दिसंबर को रहेगी शनैश्चरी अमावस्या, 16 दिसंबर को धनु संक्रांति के साथ ही शुरू होगा खरमास और 21 तारीख से शुरू होगा पौष महीना

बुधवार से अंग्रेजी कैलेंडर का आखिरी महीना दिसंबर शुरू हो रहा है। इसी महीने हिन्दी पंचांग का अगहन महीना रहेगा और पौष मास की शुरुआत भी होगी। अगहन महीने में नदियों में स्नान करने और शंख पूजा की परंपरा है। दिसंबर के पहले सप्ताह में साल का आखिरी ग्रहण भी होगा, लेकिन ये भारत में दिखाई नहीं देगा। इस महीने में श्रीराम-सीता विवाह पर्व, धनु संक्रांति और खरमास भी रहेगा। जानिए दिसंबर महीने में कब कौन से खास पर्व आ रहे हैं...

गुरुवार, 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत और शिव चतुर्दशी पर्व है। इस दिन व्रत किया जाता है। शाम को प्रदोष काल और मध्यरात्रि में भगवान शिव-पार्वती की विशेष पूजा की जाएगी।

शनिवार, 4 दिसंबर को मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या है। इस पर्व पर पितरों के लिए श्राद्ध और पूजन करने की परंपरा है। साथ ही इस दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण होगा। ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस कारण यहां इसका सूतक नहीं रहेगा। इस दिन शनैश्चरी अमावस्या भी रहेगी।

बुधवार, 8 दिसंबर को विवाह पंचमी है। त्रेतायुग में इसी तिथि पर श्रीराम और सीता का विवाह हुआ था। इस दिन श्रीराम और सीता की विशेष पूजा करें। रामायण का पाठ करें।

मंगलवार, 14 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी है। इस दिन व्रत के साथ श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन गीता जयंती पर्व भी मनाया जाता है। इस पर्व पर नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है।

गुरुवार, 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा। इसे धनु संक्रांति कहा जाता है। इस दिन नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। इस दिन से खरमास शुरू हो जाएगा। सूर्य के धनु राशि में आने से खरमास शुरू होता है। जो कि 14 जनवरी तक रहेगा। इस माह में विवाह आदि मांगलिक कर्म नहीं किए जाते हैं।

शनिवार, 18 दिसंबर को दत्तात्रेय जयंती है। इस तिथि पर ऋषि अत्रि और सति अनुसुया के पुत्र दत्तात्रेय का जन्म हुआ था। त्रिदेवों का अंश होने से शैव और वैष्णव दोनों ही भगवान दत्तात्रेय की पूजा करते हैं।

रविवार, 19 दिसंबर को मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि है। ये इस हिंदी महीने का आखिरी दिन रहेगा। अगहन महीने के इस पूर्णिमा पर्व पर स्नान-दान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है।

सोमवार, 20 दिसंबर हिंदी कैलेंडर का दसवां महीना यानी पौष मास शुरू हो जाएगा। इस महीने में भगवान सूर्य की विशेष पूजा करने की परंपरा है। ग्रंथों के मुताबिक पौष महीने में किए गए स्नान-दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है।

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