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साल का पहला शनि प्रदोष 15 को:सूर्य-शनि के अशुभ योग से बचने के लिए शनिवार को शिव पूजा का विशेष संयोग

6 दिन पहले
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इस साल तीन बार शनिवार के दिन प्रदोष तिथि का संयोग बन रहा है। इस साल के राजा शनि देव हैं। इसलिए सालभर में आने वाले तीनों शनि प्रदोष बहुत खास मान जा रहे हैं। साल का पहला शनि प्रदोष 15 जनवरी को रहेगा। इसके बाद 22 अक्टूबर और 5 नवंबर को शिव पूजा का ये संयोग बनेगा। इन शुभ योगों में शिव पूजा करने से हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं।

जरूरतमंद को कपड़े, अन्न और जूते-चप्पल का दान करें
शनि प्रदोष के दिन व्रत, पूजा और दान करने से सुख और सौभाग्य बढ़ता है। शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। उम्र बढ़ती है। संपत्ति और धन लाभ भी होता है। शनि प्रदोष के दिन जरूरतमंद लोगों को कपड़े और अन्न दान के साथ ही जूते-चप्पल का भी दान करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं।
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि इस दिन रुद्राभिषेक और शनिदेव का तेलाभिषेक करने के बाद चांदी के नाग नागिन की पूजा करनी चाहिए। फिर उन्हें पवित्र नदी में बहा देना चाहिए। शिवजी का अभिषेक करने से पितृदोष भी खत्म होता है। इसके साथ ही शनिदेव का तेल से अभिषेक करने से भी हर तरह की परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

सूर्य-शनि का अशुभ योग
14 जनवरी को सूर्य अपने शत्रु ग्रह यानी शनि की राशि मकर में आने के बाद शनि के ही साथ रहेगा। इन दो ग्रहों से बन रहे अशुभ योग के प्रभाव से बचने के लिए शनि प्रदोष पर शिव पूजा करनी चाहिए। शनि प्रदोष पर की गई शिव पूजा से शनि के अशुभ असर और परेशानियों से बचा जा सकता है।

शिव और शनि पूजा
जब शनिवार को प्रदोष यानी त्रयोदशी तिथि हो तो इस संयोग में की गई पूजा से शनि के अशुभ प्रभाव से होने वाली तकलीफों से राहत मिलती है। जो लोग शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढय्या से परेशान हैं उनके लिए 15 जनवरी को आने वाला शनि प्रदोष का दिन बहुत खास है। इस दौरान पौष मास होने से पूजा का फल और बढ़ जाएगा।

प्रदोष यानी शुक्ल और कृष्णपक्ष की तेरहवीं तिथि
शुक्ल और कृष्णपक्ष की त्रयोदशी यानी तेरहवीं तिथि को प्रदोष कहा जाता है। शिवपुराण के अनुसार शिवजी की प्रिय तिथि होने से प्रदोष में की गई शिव पूजा का विशेष फल मिलता है। भगवान शिव ही शनि देव के गुरू हैं। इसलिए सावन महीने में शनिवार के दिन शिव पूजा करने से शनिदोष के कारण होने वाली तकलीफों से राहत मिलती हैं।

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