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  • The Last Four Days Of Pitru Paksha Are Special: On 23rd September, Due To The Constellation Of Ancestors, There Will Be Maha Shradh And On 25th, Sarva Pitru Amavasya Will Be There.

पितृ पक्ष के आखिरी चार दिन होंगे खास:23 सितंबर को पितरों का नक्षत्र होने से महा श्राद्ध और 25 तारीख को रहेगी सर्व पितृ अमावस्या

8 दिन पहले
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पितृ पक्ष के आखिरी चार दिन बेहद खास रहेंगे। इनमें हर दिन विशेष श्राद्ध किया जाएगा। इनमें 22 तारीख को सन्यासियों का, 23 को पितरों का नक्षत्र होने से मघा श्राद्ध, 24 को अकाल मृत्यु वालों का और 25 को सभी पितरों का श्राद्ध करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर्व रहेगा। ये पितृ पक्ष का आखिरी दिन भी होगा। इन चारों दिनों में श्राद्ध करने से पितर संतुष्ट हो जाते हैं।

22 सितंबर, गुरुवार: इस दिन द्वादशी तिथि रहेगी। इसलिए जिन लोगों ने संन्यास लेकर घर छोड़ दिया, फिर उनकी मृत्यु हो गई। ऐसे लोगों की मृत्यु तिथि पता न हो तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि को करना चाहिए।

23 सितंबर, शुक्रवार: इस दिन त्रयोदशी तिथि और मघा नक्षत्र रहेगा। इस संयोग में किए गए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन को महाश्राद्ध या मघा श्राद्ध कहा जाता है। क्योंकि मघा नक्षत्र के स्वामी पितृ होते हैं। इसलिए ये श्राद्ध बहुत खास होता है।

24 सितंबर, शनिवार: इस दिन चतुर्दशी का श्राद्ध किया जाएगा। इस तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी हथियार से, जहर खाने या दुर्घटना में हुई हो। खुदकुशी करने वालों का श्राद्ध भी इसी तिथि पर करने का विधान है।

25 सितंबर, रविवार: इस दिन अमावस्या रहेगी। ये पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर उन सभी लोगों का श्राद्ध किया जा सकता है, जिनका श्राद्ध किसी वजह से पितृ पक्ष में करना भूल गए हो या जिन लोगों की मृत्यु तिथि नहीं पता हो। इस तिथि पर किए श्राद्ध से सभी पितर संतुष्ट हो जाते हैं।

ऐसे कर सकते हैं श्राद्ध कर्म
स्नान के बाद कुतुप काल यानी दोपहर में करीब 12 बजे श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध दक्षिण दिशा में मुंह रखकर करना चाहिए। जलते हुए कंडों के अंगारों पर गुड़-घी, खीर और भोजन अर्पित करें। हाथ में जल लें और उसमें जौ, काले तिल, चावल, गाय का दूध, सफेद फूल और जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों का ध्यान करते हुए अर्पित करें। जल तांबे के बर्तन में अर्पित करना चाहिए। इसके बाद गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए घर के बाहर भोजन रखें। जरूरतमंद लोगों को खाने का और धन का दान करें। ये श्राद्ध कर्म करने की सरल विधि है।

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