परंपराएं:अगहन मास 19 दिसंबर तक, इस माह में नदी स्नान और बाल गोपाल का अभिषेक करें

14 दिन पहले
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हिन्दी पंचांग का नवां महीना अगहन शुरू हो गया है, ये महीना 19 दिसंबर तक रहेगा। इसे मार्गशीर्ष माह भी कहा जाता है। अगहन माह में बाल गोपाल की विशेष पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मासानां मार्गशीर्षोऽहम् यानी सभी महीनों में मार्गशीर्ष मेरा ही स्वरूप है। इसी वजह से इस माह में श्रीकृष्ण और उनके अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है।

हिन्दी पंचांग में महीने की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा पर जो नक्षत्र होता है, उस नक्षत्र के नाम पर ही माह का नाम रखा गया है। जैसे मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा पर मृगशिरा नक्षत्र रहता है, इस कारण इसे मार्गशीर्ष माह कहा जाता है। मार्गशीर्ष मास में किए गए धर्म-कर्म से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। जो लोग इस माह श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं, उनकी मनोकामनाएं भगवान श्रीकृष्ण पूरी कर सकते हैं।

इस माह में कौन-कौन से शुभ कर्म करें

इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने और तीर्थ दर्शन करने का विशेष महत्व है। श्रीकृष्ण ने अपने बचपन में गोपियों को मार्गशीर्ष माह का महत्व बताया था। भगवान ने गोपियों से कहा था कि मार्गशीर्ष माह में यमुना स्नान करना चाहिए। तभी से इस माह में नदी स्नान करने की परंपरा चली आ रही है। यमुना नदी और खासतौर पर मथुरा में यमुना नदी में स्नान करने काफी लोग इस माह में पहुंचते हैं।

इस माह में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल की विशेष पूजा रोज करें। पूजा में रोज सुबह भगवान की प्रतिमा को स्नान कराएं। दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। इसके लिए शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान को अर्पित करें। अभिषेक के बाद फिर से स्वच्छ जल चढ़ाना चाहिए। स्नान के बाद भगवान को हार-फूल और वस्त्र आदि अर्पित करें। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

अगर संभव हो सके तो इस माह में श्रीकृष्ण की जन्म स्थली मथुरा की यात्रा भी की जा सकती है। मथुरा के पास गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन पर्वत के भी दर्शन करें।