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मकर संक्रांति से जुड़ी मान्यताएं:सूर्य के मकर राशि में आने के बाद कम होने लगेगी ठंड, उत्तरायण पर भीष्म पितामह ने त्यागे थे प्राण

13 दिन पहले
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  • 14 जनवरी को तिल-गुड़ का सेवन करें और दान करें, सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें

गुरुवार, 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि परिवर्तन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इसके बाद सूर्य उत्तरायण भी होता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार एक वर्ष में सूर्य की दो स्थितियां रहती हैं दक्षिणायण और उत्तरायण। उत्तरायण में दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायण में दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं। मकर संक्रांति के बाद से ही ठंड का असर कम होने लगता है।

उत्तरायण से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पं. शर्मा के मुताबिक उत्तरायण से देवताओं के दिन शुरु हो जाते हैं। सूर्य के दक्षिणायण की स्थिति देवताओं के लिए रात का समय मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। काले तिल का दान जरूरतमंद लोगों को करें।

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने की परंपरा

ये दो ऋतुओं के संधिकाल का समय है। हेमंत ऋतु जा रही है और शिशिर ऋतु शुरू हो रही है। इस वजह से मौसमी बीमारियों का असर बढ़ने लगता है। इन दिनों में तिल-गुड़ का सेवन करने से शरीर में गर्मी बनी रहती है। मौसमी बीमारियों का असर पूरी तरह से नहीं हो पाता है।

भीष्म पितामह से जुड़ी कथा

महाभारत में भीष्म पितामह कौरव सेना के सेनापति थे। युद्ध में पांडवों के लिए भीष्म को काबू कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था। वे लगातार पांडव सेना को खत्म कर रहे थे। जब पांडवों को लगा कि वे किसी भी तरह पितामह को पराजित नहीं कर पाएंगे तो उन्होंने भीष्म से ही इसका उपाय पूछा। तब भीष्म पितामह ने बताया कि तुम्हारी सेना में जो शिखंडी है, वह पहले एक स्त्री था, बाद में पुरुष बना है।

अर्जुन शिखंडी को आगे करके मुझ पर बाणों का प्रहार करेगा तो मैं बाण नहीं चलाऊंगा, क्योंकि मैं स्त्रियों पर प्रहार नहीं करता हूं। अर्जुन ने भीष्म द्वारा बताई गई योजना के अनुसार शिखंडी को आगे करके बाण चलाए और पितामह को घायल कर दिया। इच्छामृत्यु के वरदान से भीष्म बाण लगने के बाद भी सूर्य उत्तरायण होने के जीवित रहे थे। महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद जब उत्तरायण का दिन आया तब पितामह ने देह त्याग दी थी।

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