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खरमास के आखिरी 7 दिन:इन दिनों किए गए दान से मिलता है अक्षय पुण्य, पेड़-पौधे लगाने से खत्म होते हैं पाप

2 महीने पहले
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  • पौष महीने के दौरान खरमास को आध्यात्मिक रूप से मजबूती देने वाला संयोग माना गया है

पौष महीने में खरमास का संयोग 14 जनवरी तक ही रहेगा। इन दिनों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा, तीर्थ स्नान और जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि खरमास में भगवान विष्णु की पूजा और अन्य शुभ काम नहीं कर सकते तो पेड़-पौधे लगाने से ही उसका फल मिल सकता है। पं. मिश्र बताते हैं कि पौष और खरमास के संयोग में भगवान सूर्य की भी पूजा का विधान है। इन दिनों में सूर्य देव के लिए मदार का पौधा लगाना चाहिए। वहीं पीपल, आंवला और बरगद के पेड़ में भगवान विष्णु का निवास होता है। इसलिए इन पेड़ों को लगाने से हर तरह के पाप खत्म होते हैं और पितर भी संतुष्ट हो जाते हैं।

आध्यात्मिक रूप से मजबूती देने वाला महीना
पौष महीने में खरमास भी होने से इस दौरान मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। इस कारण कई लोग इसे अशुभ भी मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। काशी के पं. गणेश मिश्र बताते हैं कि पौष मास में सिर्फ सांसारिक मांगलिक कामों की मनाही है। ऋषियों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इन दिनों लोग आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनें और अपनी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकें। पौष महीने के स्वामी सूर्य हैं और वो खरमास के दौरान देव गुरु बृहस्पति की राशि में रहते हैं। इसलिए इन दिनों सूर्य के तेज और देवगुरु की दिव्यता से पौष मास आध्यात्मिक रूप से मजबूती देने वाला माना जाता है।

दान का अक्षय पुण्य
पौष और खरमास के दौरान सूर्य का तेज और देवगुरु की दिव्यता का संयोग बनता है। जिससे पवित्र मन:स्थिति से किए गए दान का अक्षय पुण्य मिलता है। इन शुभ दिनों में जरूरतमंदों की मदद और दान करने से सकरात्मकता बढ़ती है और शांति भी मिलती है। इन दिनों में गेहूं-चावल, कपड़े, तांबे या मिट्टी के बर्तन और खाना दान करना चाहिए। इन चीजों के दान का अनंत गुना पुण्य फल मिलता है।

पीपल, बरगद और आंवला लगाने से खत्म होते हैं पाप
पीपल को देव वृक्ष कहा जाता है। उपनिषदों में भी इसका महत्व बताया है। ये पेड़ सूर्य की उन किरणों को ग्रहण कर लेता है। जो पोषण देती हैं। ग्रंथों में कहा है कि पीपल में जड़ से ऊपर तक के तने में भगवान विष्णु का निवास है। पीपल के नीचे ही भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
बरगद के पेड़ में भगवान विष्णु के साथ ब्रह्माजी और शिवजी का भी वास होता है। इसलिए इस बरगद का पेड़ लगाने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। ग्रंथों में बताया गया है कि बरगद के पेड़ को छूने और दर्शन करने से ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं।
आंवले का पेड़ भी पूजनीय है। सौभाग्य और समृद्धि की कामना से कार्तिक महीने में महिलाएं इस पेड़ की पूजा करती हैं। इस पेड़ में भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मीजी का वास माना जाता है। ग्रंथों में बताया गया है कि इस पेड़ की छाया में बैठकर खाना खाने से बीमारियां दूर हो जाती हैं।

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