अगहन मास में सूर्य पूजा:इस महीने के रविवार को उगते हुए सूरज को जल चढ़ाने से दूर होती है बीमारियां, उम्र भी बढ़ती है

15 दिन पहले
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  • सूर्य को जल चढ़ाने के साथ ही इस दिन ऊनी कपड़े और गुड़ का दान करने से दूर होते हैं दोष

20 नवंबर से अगहन महीना शुरू हो गया है। जो कि 19 दिसंबर तक रहेगा। पंचांग में इसे मार्गशीर्ष महीना कहते हैं। इस महीने में भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की विशेष पूजा करने की परंपरा बताई गई है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि मैं सभी महीनों में मार्गशीर्ष हूं। यानी मार्गशीर्ष महीने को व्रत-पूजा और अन्य धार्मिक कामों में सबसे अच्छा माना गया है। इसलिए इस महीने में किए गए तीर्थ स्नान और दान का विशेष पुण्य फल मिलता है।

खास होता है अगहन महीने का रविवार
मार्गशीर्ष महीने में भगवान सूर्य की पूजा का भी विशेष फल बताया गया है। ग्रंथों में बताया गया है कि इस महीने में रविवार को उगते हुए सूरज को जल चढ़ाने से हर तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। अगहन महीने में रविवार को बिना नमक का व्रत करना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ फल में कमी आती है।
धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि मार्गशीर्ष महीने में सूर्योदय से पहले उठकर नहाना सेहत के लिए अच्छा होता है। इस महीने में सूर्योदय के वक्त सूर्य को जल चढ़ाने से हर तरह के रोग खत्म होने लगते हैं और उम्र भी बढ़ती है। वहीं, आयुर्वेद के जानकारों का कहना है कि सूर्योदय के वक्त सूर्य नमस्कार करने से हर तरह की बीमारियां दूर होती हैं।

कैसे चढ़ाए जल, किन बातों का ध्यान रखें
तांबे के लोटे में जल भरें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। सूर्य को चढ़ने वाला जल किसी चौड़े बर्तन में गिरे। जमीन पर न गिरे, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद कुछ देर सूर्य के सामने बैठकर ऊँ आदित्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को प्रणाम करें।
भगवान सूर्य को चढ़ाए हुए जल को तांबे के किसी बर्तन में इकट्‌ठा करने के बाद मदार के पेड़ में चढ़ा दें। मदार में जल न चढ़ा पाएं तो तुलसी या ऐसे पौधे में चढ़ा दें जहां वो जल किसी के पैरों में न आएं।

रविवार को किन चीजों का दान करें
अगहन महीने के दौरान शीत ऋतु के चलते ठंड से बचने के लिए जरूरतमंद लोगों को रविवार के दिन गेहूं, गुड़, ऊनी कपड़े और कंबल का दान करना चाहिए। इस महीने के रविवार को अनाज और अन्य खाने की चीजों के दान का विधान बताया गया है। साथ ही किसी गौशाला में घास और कुछ पैसे का दान करें।

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