उपासना:मंगलवार और एकादशी का योग 12 अप्रैल को, विष्णु जी के साथ ही हनुमान जी की पूजा का शुभ योग

एक वर्ष पहले
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मंगलवार, 12 अप्रैल को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, इसे कामदा एकादशी कहते हैं। कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत और विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह भगवान की पूजा करें और व्रत करने का संकल्प लें। मंगलवार को एकादशी होने से इस दिन हनुमान जी और मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों के बारे में बताया गया है। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सभी एकादशियों का महत्व समझाया था। एक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, जिस वर्ष अधिक मास रहता है, उस वर्ष में 26 एकादशियों रहती हैं। जो लोग एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले लोगों को फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं।

ऐसे कर सकते हैं विष्णु जी की पूजा

  • कामदा एकादशी पर विष्णु जी के साथ ही देवी लक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए। शंख में केसर वाला दूध भरें और भगवान को स्नान कराएं।
  • फूल, मौसमी फल, इत्र आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। मिठाई का भोग तुलसी के पत्ते के साथ लगाएं।
  • एकादशी पर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का भी अभिषेक करना चाहिए। गौमाता की प्रतिमा का भी विशेष अभिषेक करना चाहिए। भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।
  • तुलसी के पत्तों के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। इस दिन किसी गौशाला में धन के साथ ही हरी घास का भी दान करें।

कामदा एकादशी की संक्षिप्त कथा

  • महाभारत के समय एक दिन युद्धिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से चैत्र शुक्ल एकादशी की कथा के बारे में पूछा था। उस समय श्रीकृष्ण ने एक कथा सुनाई थी।
  • कथा के अनुसार रत्नपुर नाम के एक राज्य में राजा पुंडरिक रहते थे। उनके राज्य में अप्सराएं और गंधर्व भी रहते थे। उनमें ललित और ललिता नाम के गंधर्व पति-पत्नी भी थे।
  • एक दिन राजा के दरबार में गंधर्व ललित गा रहा था, लेकिन गाते समय वह पत्नी ललिता की याद में खो गया, इस कारण उसका सुर बिगड़ गया।
  • राजा ललित की इस भूल को समझ गए और गुस्सा होकर उन्होंने ललित को राक्षस बनने का शाप दे दिया। जब ललिता को ये बात मालूम हुई तो वह पति को शाप से मुक्त कराने का उपाय खोजने लगी।
  • एक दिन ललिता की मुलाकात श्रृंगी नाम के ऋषि से हुई। श्रृंगी ऋषि ने चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी पर व्रत करने के लिए कहा। ललिता ने विधि-विधान से कामदा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के फल से उसका पति फिर से ठीक हो गया।