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आने वाले तीज-त्योहार और उनका महत्व:आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में रहेंगे रथयात्रा, देवशयनी एकादशी, सोम प्रदोष और गुरु पूर्णिमा पर्व

2 महीने पहले
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आषाढ़ महीने का शुक्ल पक्ष 30 जून से शुरू हो गया है तो 13 जुलाई तक रहेगा। ये भौगोलिक, धार्मिक और सेहत के नजरिये से बहुत ही खास समय माना जाता है। इन दिनों सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में रहता है इसलिए बारिश का मौसम रहता है। सेहत के लिए इसलिए खास होता है क्योंकि इस दौरान गर्मियां कम होने लगती हैं और बारिश आ जाती है। इसलिए मौसम का संधिकाल होने के कारण सेहत संबंधी बदलाव होते हैं। वहीं, पुराणों में आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष को पुण्यदायी समय कहा गया है।

आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की शुरुआात गुप्त नवरात्रि से होती है। इन दिनों में देवी दुर्गा की विशेष पूजा के साथ शारीरिक नियम-संयम के साथ तप किया जाता है। इस शुक्ल पक्ष में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, भड़ली नवमी, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसलिए पद्म, स्कंद और विष्णु पुराण सहित अन्य ग्रंथों में आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।

आषाढ़ शुक्लपक्ष में आने वाले खास तीज-त्योहार

गुप्त नवरात्रि: सालभर में चार नवरात्र होते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल की पहली नवरात्रि चैत्र महीने में होती हैं। वहीं बड़े स्तर पर शारदीय नवरात्रि भी मनाई जाती है जो कि आश्विन महीने में आती हैं। लेकिन अश्विन महीने के बाद माघ महीने में और चैत्र के बाद आषाढ़ महीने में भी नवरात्र होते हैं। जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। आषाढ़ महीने के गुप्त नवरात्र 30 जून से शुरू हो गए हैं जो कि 8 जुलाई तक रहेंगे।

जगन्नाथ यात्रा: आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है। इसमें भगवान श्री कृष्ण, माता सुभद्रा व बलराम का पुष्य नक्षत्र में रथोत्सव निकाला जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष जगन्नाथ यात्रा यह तिथि 1 जुलाई, शुक्रवार को है।

देवशयनी एकादशी: देवशयनी एकादशी 10 जुलाई को है। ये बहुत ही खास पर्व होता है। इस दिन से धर्म-कर्म का दौर शुरू हो जाता है और सभी मांगलिक काम बंद हो जाते हैं। दरअसल माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु अगले चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं यानी कि खास तरह की नींद में रहते हैं। इसके बाद कार्तिक महीने की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी को ही जागते हैं।

आषाढ़ पूर्णिमा: आषाढ़ पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास होता है। इस दिन को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा आदि के रूप में भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 13 जुलाई को है।

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