20 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी:विष्णु जी के साथ ही श्रीकृष्ण और सूर्यदेव के पूजन का शुभ योग, सूर्य पूजा से दूर होते हैं कुंडली के दोष

14 दिन पहले
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रविवार, 20 नवंबर को मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। अगहन की उत्पन्ना एकादशी और रविवार का योग होने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। इस महीने में श्रीकृष्ण की, एकादशी पर विष्णु जी की और रविवार को सूर्य की विशेष पूजा की जाती है। 20 नवंबर को इन तीनों देवताओं के लिए पूजा-पाठ जरूर करें। ध्यान रखें धर्म-कर्म की शुरुआत गणेश पूजा के साथ करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक इस एकादशी के संबंध में मान्यता है कि भगवान विष्णु के लिए की गई पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। अगर किसी खास इच्छा के लिए एकादशी व्रत और विष्णु पूजा की जाती है तो उसमें भी सफलता मिल सकती है। एकादशी पर किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए, स्नान के बाद नदी किनारे ही दान-पुण्य जरूर करें।

सूर्य पूजा से दूर होते हैं कुंडली के ग्रह दोष

कुंडली में सूर्य की स्थिति ठीक न हो तो रविवार को सूर्यदेव की विशेष पूजा जरूर करें। सूर्य नौ ग्रहों का राजा है, इस वजह से सूर्य पूजा से सभी नौ ग्रहों के दोषों का असर कम हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं है तो उसे किसी भी काम में आसानी से सफलता और मान-सम्मान नहीं मिल पाता है।

सूर्य ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए सुबह-सुबह सूर्य पूजा करनी चाहिए, सूर्य को अर्घ्य चढ़ाना चाहिए। इस एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को तांबे के बर्तन और पीले ऊनी वस्त्रों का दान करें।

स्कंद पुराण में है एकादशी व्रत का जिक्र

हिन्दी पंचांग में एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं और जिस साल अधिक मास रहता है, उस साल में कुल 26 एकादशियां हो जाती हैं। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है।

भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को एकादशियों के बारे में जानकारी दी थी। जो भक्त एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें भगवान श्रीहरि की कृपा मिलती है। नकारात्मक विचार दूर होते हैं। अक्षय पुण्य मिलता है। घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करना चाहिए। भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी का भी अभिषेक करें। दोनों देवी-देवता को पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। फूलों से श्रृंगार करें। तुलसी के पत्तों के साथ मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम भी

एकादशी पर शिव पूजा भी करनी चाहिए। शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, हार-फूल, चंदन से श्रृंगार करें। किसी मंदिर में शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

बाल गोपाल का अभिषेक करें। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं और आरती करें।

हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।