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वट सावित्री व्रत पर शुभ संयोग:10 जून को चतुर्ग्रही योग, शनि और केतु की जन्म तिथि भी है ज्येष्ठ महीने की अमावस्या

4 दिन पहले
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  • इस बार पंचांग भेद होने से देश के कुछ हिस्सों में 9 और कुछ जगहों पर 10 जून को किया जाएगा वट सावित्री व्रत

हिंदू धर्म में पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत किया जाता है। हर साल यह व्रत ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत के लिए बहुत ही अच्छा संयोग बन रहा है। इस बार पंचांग भेद होने से देश के कुछ हिस्सों में 9 और कुछ जगहों पर 10 जून को वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा अपने ही नक्षत्र यानी रोहिणी में रहेगा। साथ ही वृष राशि में चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। सितारों की ये स्थिति शुभ रहेगी। ये अमावस्या शनि-केतु की जन्म तिथि भी है। इसलिए इस दिन वट के साथ पीपल की पूजा कर शनिदेव को प्रसन्न किया जाता है।

रोहिणी नक्षत्र के साथ चतुर्ग्रही योग होना शुभ
ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युंजय तिवारी के मुताबिक इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि और अपने ही नक्षत्र यानी रोहिणी में रहेगा। रोहिणी को सभी नक्षत्रों में शुभ माना जाता है। साथ ही वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और राहु की युति चतुर्ग्रही योग बना रही है। ये योग शुभ रहेगा। अमावस्या पर शनि अपनी ही राशि में वक्री यानी टेढ़ी चाल से चल रहा है। वक्री शनि शुभ फल देने वाला होता है। इस दिन सूर्योदय की कुंडली के लग्न भाव में शुक्र रहेगा। सौभाग्य और समृद्धि देने वाले इस ग्रह की शुभ स्थिति से वट सावित्रि व्रत का फल और बढ़ जाएगा

ज्येष्ठ अमावस्या: शनि और केतु की जन्म तिथि
डॉ. तिवारी बताते हैं कि ग्रंथों में ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को शनिदेव के साथ ही केतु की भी जन्म तिथि कहा गया है। इस दिन केतु ग्रह, शनि के नक्षत्र में और शनि देव चंद्रमा के नक्षत्र में होकर अपनी ही राशि मकर में रहेंगे। ये स्थिति शुभ मानी जा रही है। इस दिन एक लोटे में पानी, कच्चा दूध और थोड़े से काले तिल मिलाकर पीपल में चढ़ाने से ग्रह दोष खत्म होते हैं। साथ ही शनि मंदिर या अपने घर की छत पर इस दिन ध्वज यानी झंडा लगाना चाहिए। इससे केतु से जुड़े दोष खत्म होते हैं।

यमराज ने वापस किए थे सत्यवान के प्राण
इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट चले जाते हैं और आयु लंबी हो जाती है। यही नहीं अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो वह भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाते हैं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए इस दिन वट यानी कि बरगद के पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना करती हैं। इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी।

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