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  • What To Do And What Not To Do On Amavasya, If You Are Not Able To Keep Fast On This Day, Then You Can Have Food After Bathing And Worship.

अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं:इस दिन व्रत न रख पाएं तो स्नान-दान और पूजा के बाद कर सकते हैं भोजन

4 दिन पहले
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  • ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक गुरुवार को पड़ने वाली अमावस्या शुभ होती है, इस दिन बढ़ जाता है पूजा-पाठ का फल

10 जून को ज्येष्ठ महीने की अमावस्या रहेगी। इस दिन शुभ वार होने से इसका फल और बढ़ गया है। ज्योतिष के संहिता ग्रंथों में बताया गया है कि गुरुवार को पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देती है। इस तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है। स्नान-दान के बाद दिनभर व्रत रखकर शनिदेव के साथ वट और पीपल के पेड़ की पूजा करने से ग्रह दोष खत्म होते हैं। शारीरिक तकलीफ के चलते अगर इस दिन व्रत न रख पाएं तो स्नान-दान और पूजा-पाठ के बाद भोजन किया जा सकता है। ऐसा करने से भी पूरा पुण्य मिलता है।

ज्येष्ठ महीने की अमावस्या होती है खास
ज्येष्ठ अमावस्या को न्याय प्रिय ग्रह शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है। शनि दोष से बचने के लिये इस दिन शनिदोष निवारण के उपाय करने से लाभ मिलता है। वहीं ज्येष्ठ मास की अमावस्या का धार्मिक महत्व भी है। इस दिन अपने पूर्वजों की पूजा करने और गरीबों को दान पुण्य करने से पापों का नाश होता है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन पवित्र जल में स्नान करके व्रत भी रखते है।

कई लोग इसे स्नान-दान की अमावस्या के रूप में भी पूजते हैं। इतना ही नहीं शनि जयंती और स्नान-दान के साथ-साथ महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। इसलिए उत्तर भारत में तो ज्येष्ठ अमावस्या को विशेष रूप से सौभाग्यशाली एवं पुण्य फलदायी माना जाता है।

गुरुवार की अमावस्या का महत्त्व
किसी भी महीने की अमावस्या अगर गुरुवार को पड़ती है तो उसे गुरुवारी अमावस्या भी कहा जाता है। ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक ऐसी अमावस्या शुभ फल देने वाली होती है। ऐसे संयोग में किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ का पुण्य फल और भी बढ़ जाता है। गुरुवार को अमावस्या का संयोग कम ही बनता है। लेकिन इस साल फरवरी में भी गुरुवार को माघी अमावस्या थी। अब ज्येष्ठ महीने के बाद 4 नवंबर को साल की आखिरी गुरुवारी अमावस्या रहेगी।

इस दिन गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों और मथुरा एवं अन्य तीर्थों में स्नान, गौदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्त्व माना गया है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन स्नान-दान और ब्राह्मण भोजन करवाने से पितर संतुष्ट हो जाते हैं।

ज्येष्ठ महीने की अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं
1. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। लेकिन महामारी के चलते घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर नहाने से उतना ही पुण्य मिलेगा।
2. पूरे दिन व्रत या उपवास के साथ ही पूजा-पाठ और श्रद्धानुसार दान देने का संकल्प लें।
3. पूरे घर में झाडू-पौछा लगाने के बाद गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।
4. सुबह जल्दी पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं।
5. पीपल और वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करें इससे दरिद्रता मिटती है।
6. इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दान दें। माना जाता है कि अमावस्या के दिन मौन रहने के साथ ही स्नान और दान करने से हजार गायों के दान करने के समान फल मिलता है।
7. तामसिक भोजन यानी लहसुन-प्याज और मांसाहार से दूर रहें
8. किसी भी तरह का नशा न करें और पति-पत्नी एक बिस्तर पर न सोएं

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