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व्रत की पूजा विधि और महत्व:योगिनी एकादशी पर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है 88 हजार ब्राह्मण भोजन का पुण्य

10 दिन पहले
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24 जून को योगिनी एकादशी व्रत किया जाएगा। पद्म पुराण का कहना है कि योगिनी एकादशी से सभी पाप खत्म हो जाते हैं। इस व्रत को करने से शारीरिक परेशानियां भी खत्म हो जाती है। ग्रंथों में इस व्रत को सुंदर रूप, गुण और यश देने वाला बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के पुण्य के बराबर है। सबसे पहले हेममाली नाम के एक यक्ष ने इस व्रत को किया था।

श्रीकृष्ण ने सुनाई इस व्रत की कथा
भगवान श्रीकृष्ण ने इस व्रत की कथा धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। जिसमें राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नाम का यक्ष मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जाता है। इसके बाद ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी और इसकी विधि बताई। यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।

योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
1.
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं। दिनभर व्रत और श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प लें।
2. विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु को पंचामृत से नहलाएं।
3. भगवान को स्नान करवाने के बाद चरणामृत को पिए और परिवार के सभी सदस्यों को भी प्रसाद के रूप में दें। भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं और कथा सुनें।

सादा भोजन और कथा सुनना
दशमी तिथि से ही ये व्रत शुरू हो जाता है। रात में सादा भोजन करना चाहिए। अगले दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा रख उनकी पूजा करें। ध्यान रहे कि इस दिन में योगिनी एकादशी की कथा भी जरूर सुननी चाहिए। इस दिन दान कर्म करना भी बहुत कल्याणकारी रहता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विधान है।

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