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उपासना:भाई दूज पर यमराज और चित्रगुप्त की पूजा के साथ ही बहन के घर भोजन करने की है परंपरा

3 महीने पहले
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शनिवार, 6 नवंबर को भाई दूज है। इस दिन पांच दिवसीय दीपोत्सव खत्म हो जाएगा। भाई दूज पर बहन के घर खाना खाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यमराज और चित्रगुप्त से प्रार्थना करती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार पुराने समय में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था। यमुना के सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया था कि जो व्यक्ति इस तिथि यमुना नदी में स्नान करेगा और यमराज का पूजन करेगा, उसे सभी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी और सौभाग्य बढ़ेगा। इस कारण भाई दूज पर यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व है।

भाई और बहन को साथ में करनी चाहिए पूजा

बहन और भाई को यम के साथ ही चित्रगुप्त की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा में बहन को प्रार्थना करनी चाहिए कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य और अश्वत्थामा, इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी होने का वर दें। इस तरह पूजा में बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सौभाग्य प्रार्थना करनी चाहिए। पूजा के बाद भाई बहन के घर भोजन करता है। भोजन के बाद बहन भाई को तिलक लगाती है। भाई बहन को कोई उपहार देता है।

यमुना नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में यमुना नदी या गंगा नदी का जल पानी में मिलाएं और पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करें। स्नान के बाद यमराज और यमुना की पूजा करें।