उपवास:23 नवंबर को मंगलवार और चतुर्थी का योग, गणेश जी के साथ ही करें मंगल देव की भी पूजा

13 दिन पहले
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मंगलवार, 23 नवंबर को गणेश चतुर्थी व्रत है। अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी मंगलवार को होने से इसे अंगारक गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। इस तिथि पर घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए गणेश जी के लिए व्रत-उपवास करने की परंपरा है। मंगलवार को चतुर्थी होने से इस दिन गणेश जी के साथ ही मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार चतुर्थी गणेशजी की तिथि है। इस दिन गणेशजी के लिए व्रत-उपवास और पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। मंगलवार का कारक ग्रह मंगल है। इस वजह से चतुर्थी पर मंगल की भी पूजा करें।

मंगल देव हैं ग्रहों के सेनापति

ज्योतिष में मंगल देव को ग्रहों का सेनापति माना गया है। ये ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। अंगारक चतुर्थी पर सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश जी का अभिषेक करें। वस्त्र और फूल चढ़ाएं। जनेऊ आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं। धूप दीप जलाएं।

श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। फलों का भोग लगाएं। गणेश जी के 12 नाम वाले मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। गणेशजी के मंत्र- ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।

गणेश पूजन के बाद मंगल ग्रह को लाल फूल चढ़ाना चाहिए। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। मंगल देव को जल चढ़ाएं, लाल गुलाल और लाल फूल चढ़ाएं। मंगलदेव की भात पूजा खासतौर पर की जाती है। भात पूजा में शिवलिंग का पके हुए चावल से श्रृंगार करना चाहिए। ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।