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राशि परिवर्तन:20 नवंबर को गुरु कुंभ राशि में करेगा प्रवेश, खत्म हो जाएगी शनि और गुरु की जोड़ी

16 दिन पहले
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शनिवार, 20 नवंबर 2021 की रात 08.08 मिनट पर गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। कुंभ शनि की स्वामित्व वाली राशि है। गुरु और शनि समभाव होते है यानी इनमें शत्रु भाव नहीं होता है। गुरु करीब 12 साल बाद कुंभ राशि में प्रवेश करेगा।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार गुरु अपनी नीच राशि मकर से निकलकर कुंभ में प्रवेश करेगा। इस के साथ ही मकर राशि में बनी हुई गुरु और शनि की जोड़ी खत्म हो जाएगी।

एक राशि में करीब 13 माह रुकता है गुरु

एक राशि में गुरु करीब 13 माह रहता है। वक्री और मार्गी होने से गुरु के एक राशि में रुकने का समय बदल सकता है। आमतौर पर किसी भी राशि में दोबारा आने में गुरु को करीब बारह साल का समय लगता है। बारह वर्ष पहले 2009-10 में गुरु कुंभ राशि में था।

कुंभ राशि के गुरु का कैसा हो सकता है असर

कुंभ राशि में गुरु के आने से उसकी पूर्ण दृष्टि मिथुन, सिंह और तुला पर रहेगी। इस वर्ष पहले भी गुरु कुंभ राशि में रहकर वक्री होकर मकर राशि में आया था। 18 अक्टूबर 21 को गुरु मकर राशि में मार्गी हुआ था। 20 नवंबर 2021 को गुरु फिर से कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। कुंभ राशि में गुरु आने से राजनीति में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकता है। कई राज्यों में होने वाले चुनावों के नतीजे सत्तारुढ़ सरकारों के पक्ष में आने में दिक्कतें आ सकती हैं। मंहगाई घटेगी एवं करों का बोझ कम होगा। देश में रोगों की कमी होगी। जमीन, मकान सस्ते होंगे।

गुरु ग्रह के लिए करना चाहिए चने की दाल का दान

गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में ही की जाती है। गुरु ग्रह की विशेष पूजा हर गुरुवार करनी चाहिए। इसके लिए शिवलिंग पर चने की दाल और पीले फूल चढ़ाएं। बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। गुरु ग्रह के मंत्र ऊँ बृं बृहस्पतये नमः का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। किसी गौशाला में हरी घास दान करें।