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साल का आखिरी ग्रहण आज:अंटार्कटिका में पूर्ण और अफ्रीका में आंशिक सूर्य ग्रहण; भारत में नहीं दिखेगा इसलिए धार्मिक महत्व भी नहीं

एक महीने पहले
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  • ज्योतिषीयों के मुताबिक 23 नवंबर 1946 को जैसी ग्रह स्थिति में सूर्य ग्रहण हुआ था वैसी ही स्थिति आज बन रही है

आज साल का आखिरी सूर्य ग्रहण हो रहा है। ये अंटार्कटिका महाद्वीप पर पूर्ण और अफ्रीका, नामीबिया सहित अन्य कुछ देशों में आंशिक रूप से दिखेगा। भारत में ये ग्रहण नहीं दिखेगा। इसका सूतक मान्य नहीं होने से इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व भी नहीं रहेगा। ये भारतीय समय के मुताबिक सुबह करीब 10.59 पर शुरू होगा और दोपहर तकरीबन 3.07 पर खत्म होगा। भारत में अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को होगा।

ग्रहण का समय: कब से कब तक
भारतीय समय के हिसाब से सुबह 10.59 पर ग्रहण की शुरुआत होगी तब ये आंशिक रूप में रहेगा। इस वक्त चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी और सूर्य के बीच में आना शुरू करेगा। फिर दिन में 12.30 पर ये ग्रहण अपनी चरम स्थिति पर रहेगा। यानी दोपहर 1.04 पर पूर्ण ग्रहण में तब्दील हो जाएगा और इस वक्त सूर्य का 103.6% हिस्सा ढंक जाएगा। ये स्थिति करीब 1 मिनिट 57 सेकंड तक रहेगी। इसके बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण कम होकर दोपहर 1.36 पर खत्म हो जाएगा। फिर आंशिक रूप से ग्रहण रहेगा। इसके बाद दोपहर 3.07 पर सूर्य ग्रहण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

अंटार्कटिका में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा
अंटार्कटिका में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा

अंटार्कटिका में पूर्ण और अन्य जगहों पर आंशिक ग्रहण
ये ग्रहण अंटार्कटिका और दक्षिण महासागर में पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। वहीं दक्षिण अफ्रीका में केप टाउन और जॉर्ज, नामीबिया में स्वाकोपमुंड, ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न, होबार्ट और न्यूजीलैंड में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण के वक्त आधे से ज्यादा छुप गया सूर्य
पूर्ण सूर्य ग्रहण के वक्त आधे से ज्यादा छुप गया सूर्य

तीन तरह के सूर्य ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण: इस स्थिति में चंद्रमा धरती के ज्यादा करीब रहते हुए पूरी तरह सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। ऐसी स्थिति में सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा के पीछे छुपा हुआ दिखता है और धरती के कुछ हिस्से पर चंद्रमा की घनी छाया पड़ती है। ऐसी छाया वाले हिस्से पूर्ण सूर्य ग्रहण में आते हैं।

आंशिक सूर्य ग्रहण: जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आता है तब कुछ जगहों पर घनी छाया और उसके आसपास हल्की छाया बनती है। हल्की छाया को उपछाया कहते हैं। जहां ये उपछाया रहती है वहां आंशिक सूर्य ग्रहण होता है। आंशिक ग्रहण की स्थिति में सूर्य थोड़ा सा कटा हुआ नजर आता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण: ऐसी स्थिति में चन्द्रमा धरती से ज्यादा दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। ऐसे में सूर्य का बाहरी हिस्सा कंगन या वलय के रूप में चमकता हुआ दिखता है। कंगन आकार में बने हुए ऐसे सूर्य ग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

ज्योतिष: 75 साल बाद पंचग्रही योग में सूर्य ग्रहण
4 दिसंबर को ग्रहों की जो स्थिति बन रही है वैसी ही 23 नवंबर 1946 को बनी थी। यानी 75 साल बाद अगहन महीने की शनैश्चरी अमावस्या पर सूर्य ग्रहण होने के साथ ही वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध और केतु के साथ पंचग्रही योग भी बन रहा है। सितारों की इस स्थिति का असर देश-दुनिया सहित सभी राशियों पर पड़ेगा। इस बार का सूर्य ग्रहण भी देशभर में नहीं दिखेगा। इसलिए इसका सूतक मान्य नहीं होगा। जिससे पूरे दिन पूजा-पाठ और स्नान-दान किए जा सकेंगे। इस ग्रहण के कारण मेष, वृष, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों को विशेष सावधानी रखनी होगी। अन्य राशियों के लिए ये सूर्य ग्रहण सामान्य फल देने वाला रहेगा।

पांच ग्रहों का असर
इन ग्रहों के प्रभाव से देश में बड़े राजनीतिक बदलाव और कूटनीतिक क्षेत्र में सफलता के संकेत मिल रहे हैं। देश में मौसमी बदलाव से लोगों की परेशानियां बढ़ सकती है। विवाद, दुर्घटनाएं और आंदोलन बढ़ सकते हैं। प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। देश में कई जगह आगजनी की भी घटनाएं होने का अंदेशा बना रहेगा।

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