ग्रह-गोचर:इस साल दो बार अस्त होगा शुक्र, लेकिन सिर्फ राशियों और मौसम पर ही दिखेगा इसका असर

22 दिन पहले
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इस साल शुक्र ग्रह दो बार अस्त होगा। इससे पहले 2018 में भी ऐसा हुआ था। इस महीने ये ग्रह 6 से 11 जनवरी तक यानी सिर्फ 5 दिन के लिए अस्त रहेगा। इस दौरान खरमास होने के कारण मांगलिक कामों पर शुक्र के अस्त होने का खास असर नहीं होगा। इसके बाद फिर 2 अक्टूबर से 20 नवंबर तक शुक्र अस्त होगा। इस दौरान चातुर्मास होने से मांगलिक काम नहीं होंगे। शुक्र के अस्त होने का असर मौसम और 12 राशियों पर जरूर दिखेगा। शुक्र के अस्त होने से इसके शुभ फल में कमी आएगी। जिससे कई लोगों का खर्चा बढ़ सकता है। वहीं कुछ को धन हानि भी हो सकती है। शुक्र के अस्त होने से बेमौसम बारिश होने के योग बनेंगे।

शुक्र उदय के बाद पहला विवाह मुहूर्त 15 जनवरी को
15 दिसंबर से सूर्य धनु राशि में आ गया था। तब से खरमास शुरू हो गया था। इस कारण विवाह के मुहूर्त नहीं है। अब इस महीने सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति महापर्व पर 15 जनवरी के बाद से विवाह मुहूर्त की शुरुआत होगी। इस वक्त शुक्र भी उदय होने से मांगलिक कामों में रुकावट नहीं होगी।

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि शुक्र के उदय होने के बाद पहला विवाह मुहूर्त 15 जनवरी को शुरू होगा। इसके बाद 20, 23, 27 और 29 जनवरी को भी शादी के मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद फरवरी में सिर्फ 5 दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। शुक्र के उदय या अस्त होने के बावजूद मांगलिक कामों के लिए खरीदारी भी की जा सकती है। इस पर शुक्र की स्थिति का असर नहीं पड़ेगा।

पिछले महीने से गड़बड़ है शुक्र की चाल
19 दिसंबर 2021 को शुक्र ग्रह मकर राशि में वक्री हुआ था। यानी टेढ़ी चाल से चलने लगा था। फिर आगे चलने की बजाय ये ग्रह 30 दिसंबर को एक राशि पीछे यानी धनु में चला गया। अब वक्री रहते हुए ही पहले अस्त और फिर उदय हो जाएगा। इसके बाद महीने के आखिरी में मार्गी होगा। यानी सीधी चाल से चलेगा। आमतौर पर ये ग्रह एक राशि में 27 दिन तक रहता है। लेकिन इस बार ये धनु राशि में कुल 98 और मकर में 54 दिन रहा।

सूर्य-शुक्र के बीच 10 अंश के अंतर पर अस्त होता है शुक्र
डॉ. मिश्र का कहना है कि जिस प्रकार किसी भी ग्रह का सूर्य के नजदीक आना उसे अस्त कर सकता है, ठीक उसी प्रकार जब शुक्र ग्रह का गोचर होता है और वह किसी विशेष स्थिति में सूर्य के इतना समीप आ जाता है कि उन दोनों के मध्य 10 अंश का ही अंतर रह जाता है तो शुक्र ग्रह अस्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में शुक्र के मुख्य कारक तत्वों में कमी आ जाती है और वह अपने शुभ फल देने में कमी कर सकता है।

प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसके जीवन में स्नेह और प्रेम बरकरार रहे और सभी प्रकार के सुख उसे प्राप्त होते रहें। इसके लिए शुक्र ग्रह का मजबूत होना अति आवश्यक है। शुक्र एक कोमल ग्रह है और सूर्य एक क्रूर ग्रह। इसलिए जब शुक्र अस्त होता है तो उसके शुभ परिणामों की कमी हो जाती है और ऐसे में व्यक्ति कई प्रकार के सुखों से वंचित हो सकता है।

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