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  • The Longest Day Of The Year And The Shortest Night On 21st June, The Change Of The Sun's Constellation On 22nd Will Make Good Rains.

सूर्य हुआ दक्षिणायन:21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात, 22 को सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से बनेंगे अच्छी बारिश के योग

12 दिन पहले
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आज सूर्य कर्क रेखा पर रहेगा और दक्षिणायन हो जाएगा। जिन शहरों से होकर कर्क रेखा गुजरती है वहां दिन में सूर्य सिर के ठीक ऊपर रहेगा। ये एक खगोलीय घटना है। इसलिए वेधशालाओं में इसे शंकु यंत्र की मदद से देखा जा सकेगा। वहीं अगले दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएगा। इन दोनों घटनाओं का असर भी मौसम पर दिखेगा। ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाए तो इस नक्षत्र में सूर्य के आने से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। इसलिए मौसम परिवर्तन के लिहाज से हर साल 21 और 22 जून को खास तारीखों में गिना जाता है।

सूर्य से बदलता है मौसम
सूर्य से ही मौसम में बदलाव होते हैं। हर महीने के बीच में 13 से 15 तारीख तक सूर्य का राशि परिवर्तन करता है। वहीं, हर 15 दिनों में ये ग्रह एक नक्षत्र भी बदलता है। इन्हीं तारीखों पर ऋतुएं भी बदलती हैं। इस ग्रह की स्थिति से ही कालगणना होती है। दिन-रात से लेकर महीने, ऋतुएं और सालों की गिनती सूर्य के बिना नहीं की जा सकती। सूर्य देवता को ही ज्योतिष का जनक माना गया है और सूर्य सभी ग्रहों का राजा भी है।

खगोलीय घटना: साल का सबसे बड़ा दिन
जीवाजी वेधशाला उज्जैन के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त का कहना है कि 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात रहेगी। दोपहर में ऐसी स्थिति बनेगी जब सूर्य सिर के ठीक उपर आ जाएगा। जिससे कुछ देर के लिए परछाई गायब हो जाएगी। इस तारीख को करीब 13 घंटे 34 मिनट का दिन रहेगा। वहीं, रात तकरीबन 10 घंटे 26 मिनट की होगी। 21 जून से ही सूर्य दक्षिण की ओर चलने लगेगा। इस दिन से ही दक्षिणायन की शुरुआत हो जाएगी। सूर्य के दक्षिणायन से मौसमी बदलाव भी शुरू हो जाते हैं।

ज्योतिषीय परिवर्तन: सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करता है तो उसके करीब 6-7 दिन बाद ही वो आर्द्रा नक्षत्र में आ जाता है। इस नक्षत्र में सूर्य तकरीबन 15 दिनों तक रहता है। तब तक भारत में मानसून आ जाता है। इसलिए मिथुन राशि और आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य के होने से मौसमी बदलाव होते है। आर्द्रा नक्षत्र का नाम आर्द्र शब्द से बना है। जिसका अर्थ होता है 'गीलापन' आसमान में इस नक्षत्र की स्थिति ऐसी ही है कि जब-जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तब मौसमी बदलाव होकर बारीश शुरू हो जाती है।

अंगारक योग से प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
27 जून, सोमवार को मंगल मीन राशि से निकलकर अपनी ही राशि मेष में प्रवेश करेगा। जहां पहले से ही राहु मौजूद है। जिससे अब 10 अगस्त तक मंगल-राहु की युति बनेगी। इस योग ज्योतिष में अशुभ माना गया है। इन दोनों ग्रहों के साथ होने से जनहानि के योग बनते हैं। इस दौरान मौसमी बदलाव से प्राकृतिक आपदाएं आएंगी। जिससे लैंड स्लाइड, बाढ़, पुल-सड़कें धंसना और भूकंप आने की आशंका रहेगी। वहीं, देश में उपद्रव, हिंसा, आगजनी और विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं।

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