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लॉकडाउन इफेक्ट / सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी में आर्थिक संकट, 21 हजार कर्मचारियों की सैलरी में हो सकती है देरी

तिरुपति बालाजी मंदिर में आम दिनों में लगभग 80 हजार से एक लाख तक श्रद्धालु होते हैं। लेकिन, लॉकडाउन के कारण 20 मार्च से यहां दर्शन बंद हैं।
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  • हर महीने कर्मचारियों की सैलेरी और भत्तों पर लगभग 120 करोड़ से ज्यादा का खर्च 
  • साल 2020-21 के लिए 3300 करोड़ से ज्यादा का है तिरुपति ट्रस्ट का बजट

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 04:06 PM IST

भोपाल. देश का सबसे अमीर माना जाने वाला तिरुपति बालाजी मंदिर भी लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। मंदिर ट्रस्ट इस महीने अपने 21 हजार कर्मचारियों को समय पर सैलरी देने में परेशानी का सामना कर रहा है। कर्मचारियों को इसकी इत्तला भी दी जा चुकी है कि सैलेरी काटी या रोकी नहीं जाएगी, लेकिन कुछ समय की देर हो सकती है।

20 मार्च से आम श्रद्धालुओं के लिए बंद पड़े तिरुपति मंदिर को हर महीने लगभग 200 करोड़ रुपए का दान कैश और हुंडियों के जरिए मिलता है। पिछले 55 दिनों में मंदिर ट्रस्ट को लगभग 400 करोड़ के दान का नुकसान हो चुका है। 

दान में आई गिरावट के कारण ट्रस्ट को अपने दैनिक कामों और खर्चों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस फाइनेंशियल साल (2020-21) के लिए फरवरी में ही ट्रस्ट ने 3309 करोड़ रुपए का बजट फिक्स कर लिया था।

ट्रस्ट के पीआरओ टी. रवि के मुताबिक ट्रस्ट में 21 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। इनमें से आठ हजार कर्मचारी स्थायी नियुक्तियों पर हैं, शेष 13 हजार कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट बेस पर हैं। जिस तरह बाकी संस्थानों को लॉकडाइन के कारण आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है, वैसे ही तिरुपति ट्रस्ट को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रस्ट अपने कर्मचारियों की सैलेरी और भत्तों का भुगतान समय पर कर पाने में थोड़ी समस्या का सामना कर रहा है। 

हर दिन लगभग 80 हजार श्रद्धालु 

मंदिर में आम दिनों में लगभग 80 हजार से एक लाख तक श्रद्धालु होते हैं। लेकिन, लॉकडाउन के कारण 20 मार्च से यहां दर्शन बंद है। सिर्फ पुजारियों और मंदिर अधिकारियों के ही प्रवेश की अनुमति है। एक महीने में करीब 150 से 170 करोड़ का दान हुंडियों से प्राप्त होता है, इसके अलावा लड्डू प्रसादम् की बिक्री, रेस्ट हाउस, यात्री निवास आदि से जो आय होती है, उन सबको मिलाकर एक महीने में 200 से 220 करोड़ की आय मंदिर को होती है। इनमें से 120 करोड़ रुपए अकेले वेतन और भत्तों पर खर्च होता है। साल 2020-21 में कर्मचारियों के वेतन पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। 

मंदिर के फिक्स डिपोजिट और सोने का उपयोग नहीं करेंगे

मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन वायएस सुब्बारेड्डी ने स्पष्ट किया है कि सैलरी और भत्तों के भुगतान के लिए मंदिर ट्रस्ट कभी अपने फिक्स डिपोजिट और गोल्ड रिजर्व को हाथ नहीं लगाएगा। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् ट्रस्ट के पास करीब 1400 करोड़ का कैश और लगभग 8 टन सोना रिजर्व है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने भी ट्रस्ट को ऐसा ना करने के लिए कहा है क्योंकि ये राशि और सोना भक्तों ने दिया है। इससे उनकी भावनाएं जुड़ी हैं। इसका इस्तेमाल ट्रस्ट के खर्चों के लिए नहीं किया जाएगा। 

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