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  • Mahakaleshwar Temple Ujjain After 79 Days, Baba Will Open The Doors Of Mahakal, Enter The Sanctum Sanctorum And See Whether Bhasmarti Darshan Can Be Done In The Spring Or Not.

महाकाल के शहर उज्जैन से:79 दिन बाद खुले मंदिर के द्वार, गर्भगृह में प्रवेश और भस्मारती दर्शन सावन में भी हो पाएंगे या नहीं, अभी तय नहीं

4 महीने पहले
महाकाल मंदिर में 16 मार्च से भस्मारती दर्शन और 21 मार्च से आम भक्तों के लिए प्रवेश बंद था।  फोटो/वीडियो - अनिकेत सेन, उज्जैन
  • कोरोना यहां बेताल की तरह परीक्षा ले रहा है, सिस्टम एक समस्या को सुलझाता है तो दूसरी तैयार रहती है
  • मध्यप्रदेश में कोरोना से मौत के मामले में इंदौर पहले, भोपाल दूसरे और उज्जैन तीसरे नंबर पर
  • विवाद की वजह से महाकाल के गर्भगृह में अल्कोहल युक्त सैनेटाइजर का उपयोग नहीं हो रहा

उज्जैन से रितेश पटेल के साथ हरिनारायण शर्मा 

उज्जैन का महाकाल मंदिर 79 दिन बाद 8 जून को आम भक्तों के लिए खोला तो गया, लेकिन सिर्फ दर्शन के लिए। पूजन-अर्चन के लिए नहीं। 16 मार्च से भस्मारती दर्शन और 21 मार्च से मंदिर में आम भक्तों के लिए प्रवेश बंद था। कोरोना की शुरुआत में लोग यहां बेफिक्र थे कि हम तो बचे हुए हैं, लेकिन देखते ही देखते मौतों का आंकड़ा बढ़ा और अब यह प्रदेश का तीसरा बड़ा कोरोना हॉटस्पॉट बन चुका है। अब तक यहां 725 संक्रमित मिल चुके हैं। कोरोना से मौत के मामले में यह इंदौर, भोपाल के बाद तीसरे नंबर पर है। यहां 64 लोगों की मौतें हो चुकी है।

अभी हम खड़े हैं विक्रम विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने जहां, स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोहे को रिसाइकल कर बनाया गया विक्रम-बेताल का पुतला रखा गया है, लेकिन फिलहाल यहां कोरोना की स्थिति भी इन दो पात्रों की तरह ही है। प्रदेश के सबसे पहले निजी मेडिकल कॉलेज आरडी गार्डी की अव्यवस्थाएं विक्रमादित्य की इस नगरी के लिए बेताल से कम नहीं थीं। 850 बेड के इस हॉस्पिटल में लोग जाने से डरने लगे थे। सोशल मीडिया पर भी यहां की अव्यवस्थाएं वायरल होने लगी थीं। इसे जैसे-तैसे सुधारा गया तो बड़नगर के 6 परिवारों में ही 60 लोग संक्रमित हो गए। कुछ अन्य कस्बों में भी मरीज बढ़े। 

इसी बेताल से बचने के लिए प्रदेश में फीवर क्लिनिक से पहले यहां 27 मोहल्ला क्लिनिक खुल गए। कलेक्टर आशीष सिंह कहते हैं इससे हमें राहत मिली और आंकड़े कम होने लगे, लेकिन मौतें हो रही थीं। लोग बीमारी छुपा रहे थे। फिर हमने सर्वे टीम तैयार की। उसमें उन डॉक्टरों को ही हेड बनाया जो उस क्षेत्र में इलाज करते थे। इन्हें देखकर लोगों का डर कम हुआ, क्योंकि उनके डॉक्टर ही उनके बीच पहुंचे थे। इससे मोहल्ला क्लिनिक की ओपीडी प्रतिदिन 4 हजार तक पहुंची।

लोग जांच कराने के लिए आगे आए तो मरीज बढ़े और इससे हॉस्पिटल समेत अन्य संसाधनों की आवश्यकता बढ़ी। ऐसे में तीन साल पुरानी एक बिल्डिंग को 100 बेड के अस्पताल में बदला गया। 100 बेड के लिए इंदौर के अरविंदो और देवास के अमलतास मेडिकल कॉलेज की मदद ली गई। हालांकि पिछले सप्ताह कोरोना की समीक्षा करने आए केंद्रीय सचिव केसी गुप्ता ने अब यहां कोरोना नियंत्रण की स्थिति पर संतोष जताया है। 

सोमवार को स्थानीय श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। सुबह 8 से शाम 6 तक दर्शन महाकाल के ऐप और टोल फ्री नंबर पर प्री-बुकिंग के आधार पर हो रहे हैं। सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच टाइम स्लॉट के मुताबिक ही दर्शन किए जा सकेंगे। फोटो/वीडियो - अनिकेत सेन, उज्जैन
सोमवार को स्थानीय श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। सुबह 8 से शाम 6 तक दर्शन महाकाल के ऐप और टोल फ्री नंबर पर प्री-बुकिंग के आधार पर हो रहे हैं। सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच टाइम स्लॉट के मुताबिक ही दर्शन किए जा सकेंगे। फोटो/वीडियो - अनिकेत सेन, उज्जैन
  • यहां तो सब कुछ महाकाल के भरोसे: पंडित महेश गुरु कहते हैं- उज्जैन में कोई भक्त एक बोरी चावल लेकर निकले और दो-दो दाने एक मंदिर में चढ़ाए तो चावल खत्म हो जाएंगे, मंदिर नहीं। यहां 250 से ज्यादा बड़े मंदिर हैं, जहां कई लोगों की आजीविका देव-दर्शन के लिए आने वालों से ही चलती है। ढाई महीने से ज्यादा सब कुछ बंद रहा। अभी भी फल-फूल, प्रसाद, आवागमन, होटल, भोजनालय पूरी तरह नहीं खुले हैं। पिछले 100 साल में तो यहां ऐसा हुआ हो, इन कानों ने नहीं सुना। पंडित महेश गुरु की पीढ़ियां 300 साल से यहां पूजा करती आ रही हैं।
  • सावन, नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर के दर्शन पर भी चिंता: महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष गुरु कहते हैं कि चिंता सावन की है। अब सावन शुरू होने के 28 दिन बचे हैं। जुलाई में सावन की शुरुआत सोमवार से ही होगी। सावन में यहां हर दिन 70-80 हजार श्रद्धालु आते हैं। सावन सोमवार को यह संख्या एक लाख से ज्यादा हो जाती है। हम नहीं चाहते कि महाकाल किसी से दूर हों, लेकिन अभी सवारियों के विषय में सोचना बाकी है। सवारी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ऐसा पर्व 12 ज्योर्तिलिंग में सिर्फ यहीं मनता है। नागपंचमी भी जुलाई के चौथे सप्ताह में होगी। यहां नागचंद्रश्वेर की पूजा भी बड़े स्तर पर होती है, जो मंदिर साल में एक ही दिन खुलता है।

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