पं. बंगाल में आज से दुर्गा पूजा:कोलकाता में मलेशिया के ट्विन्स टॉवर में विराजेंगी देवी, 4 महीने में 25 लाख के खर्च से तैयार हुआ पंडाल

कोलकाता2 महीने पहलेलेखक: ताराचंद गवारिया

पं. बंगाल में आज से 4 दिनी दुर्गा पूजा शुरू हो रही है। कोरोना काल के बाद पं. बंगाल में ये पहला दुर्गात्सव है, जो बिना पाबंदियों के मनाया जा रहा है। कोलकाता में भारी उत्साह है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे कोलकाता में छोटे-बड़े सब मिलाकर करीब 4,000 पंडाल लगे हैं। कई पंडाल 4-5 दिन पहले ही लोगों के लिए खोल दिए गए।

कोलकाता के दुर्गा पंडाल हमेशा अपनी खूबसूरती और भव्यता के लिए जाने जाते रहे हैं। एक बात जो यहां के पंडालों को खास बनाती है वो है देश-दुनिया के मौजूदा बड़े मुद्दे और देश की सांस्कृतिक विरासत की झलक, जो हमेशा ही इन पंडालों में दिखाई देती है। इस साल जो सबसे खूबसूरत 5 पंडालों के नजारे हम कोलकाता से आपके लिए लाए हैं।

कहीं मलेशिया के ट्विन्स टॉवर, कहीं दिल्ली का लाल किला, तो कहीं आदिवासी सभ्यता की झलक हैं। देखिए, कोलकाता के 5 बेहतरीन पंडालों के नजारे...

कल्याणी में मलेशिया के ट्विंस टॉवर 25 लाख में बने

कोलकता से 60 किमी दूर कल्याणी में मलेशिया में बने ट्विन्स टावर को बनाया गया है। कल्याणी ITI दुर्गा समिति के अध्यक्ष अरूप मुखर्जी बताते है कि 152 फीट ऊंचा और 100 फीट चौड़ा ट्विन्स टावर बनाया गया। इसमे खास तरह की लाइटिंग भी की गई जिससे ये रात में भव्य दिखाई देता है। इसे बनाने में करीब 25 लाख का खर्चा आया है। इसे 25 सितंबर को ही लोगों के लिए खोल दिया गया। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं।

लेबुताला में लाल किले पर आजादी का अमृत महोत्सव

कोलकाता के लेबुताला स्थित संतोष मित्र स्क्वायर समिति ने इस बार आजादी के अमृत महोत्सव थीम पर दिल्ली लाल किला बनाया है। 27 सितंबर से ये दुर्गा पंडाल जनता के लिए खोल दिया गया है। समिति के महासचिव सैजल घोष बताते हैं कि इस साल इस पूजा को 87 साल होने को जा रहे है। पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, इसलिए हमने भी इसी थीम को अपनाया और लाल किला बनाया। जिसमें मां दुर्गा विराजमान हैं। ये किला 75 फीट ऊंचा और 120 फीट चौड़ा है। इसे बनाने में 4 महीने लगे। इसके साथ ही 3D लइटिंग की गई है। किले के ऊपर लेजर लाइट से स्वतंत्रता सेनानियों के साथ देश के जवानों और किसानों के को भी दिखाया जा रहा है।

सर्बोजनिन में आदिवासियों का पूरा गांव

साल्टलेक के पास बने दुर्गा पंडाल में आदिवासी जनजीवन को दिखाया गया। सर्बोजनिन दुर्गा उत्सव समिति के सचिव बताते हैं कि इस बार हमने दुर्गा पंडाल में आदिवासियों का पूरा गांव बनाया है। वो कैसे जीवन जीते है वो भी दिखाया गया। आदिवासियों को प्रमोट करने के लिए इस थीम को हमने बनाया है। 6 महीने लगे इस पूरे गाँव को बसाने में इसके साथ ही 200 लोगो की टीम ने काम किया है।

50 आर्टिस्ट्स ने मिलकर कपड़ों पर बनाई 5000 से ज्यादा पेंटिंग

कोलकाता है भवानीपुर 75 पल्ली में एक अनोखा पंडाल बनाया है। जिसमें बंगाल की लुप्त रही पटचटाई कला और संस्कृति को फिर से जीवित करने का प्रयास किया है। पंडाल के अंदर कपड़ों पर बनी करीब 5000 से ज्यादा पेंटिंग्स और शिल्प कला है। पिछले साल UNESCO ने दूर्गा पूजा को सास्कृतिक विरासत में शामिल किया इसी कारण इस बार पंडाल का थीम यही रखी। 50 से ज्यादा आर्टिस्ट्स ने करीब 6 महीने में कपड़ों पर इन पेटिंग्स को बनाया है। दो साल से इस थीम पर काम चल रहा था। इस पंडाल में एक खास बात ये फिर ही एक भी पेंटिंग रिपीट नहीं हुई है।

पूरा पंडाल लोहे का, 15,000 लोगों ने बनाया

यहां पर द मोशन थीम पर दुर्गा पंडाल बनाया गया है। ये पूरा पंडाल लोहे का बना है। इसे एक महीने में तैयार किया गया है। मीडिया प्रभारी सुभोजित बताते है कि इस पंडाल को बनाने में 15,000 लोगों ने मिलकर बनाया है। इसे सुसंता पॉल और उनकी टीम ने इसे बनाया है। इसमें सैंकड़ों टन लोहे का इस्तेमाल किया गया है। इस पंडाल को शुरू से अंत बनाने की प्रक्रिया को कई सारी तस्वीर में फ्रेम कर पंडाल के बाहर लगाया गया है। जिसे ये कैसे बना, वो आप जान सकते हैं।

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