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नवरात्रि / तीसरा दिन, परेशानियों और भय से मुक्ति के लिए की जाती है देवी चंद्रघंटा की पूजा

Chaitra Navratri 2020 Devi Maa Chandraghanta Puja Vidhi Day 3 |  Chandraghanta Puja Mantra,  Maa Chandraghanta Vrat Katha, Story Importance and Significance
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Chaitra Navratri 2020 Devi Maa Chandraghanta Puja Vidhi Day 3 |  Chandraghanta Puja Mantra,  Maa Chandraghanta Vrat Katha, Story Importance and Significance

  • युद्ध में इनके घंटे की टंकार से ही असुरों का नाश कर दिया था इसलिए इन्हें कहा जाता है चंद्रघंटा

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 06:23 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. चैत्र नवरात्र की तृतीया तिथि माता चंद्रघंटा को समर्पित है। इस बार 27 मार्च, शुक्रवार को तृतीया तिथि रहेगी। चंद्रघंटा माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनका रंग सोने के समान चमकीला है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तैयार रहने जैसी है। इनके घंटे की भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव, दैत्य आदि सभी डरते हैं। असुरों के साथ युद्ध में देवी चंद्रघंटा ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था।


कैसे करें पूजा
  • वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा की पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।
  • मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से भक्त से सभी पाप नष्ट हो जाते है और उसकी राह में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती है। इस देवी की पूजा करने से, सभी दुखों और भय से मुक्ति मिलती है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को असीम शांति और सुख सम्पदा का वरदान देती है।
 

देवी का स्वरूप
देवी चंद्रघंटा का शरीर सोने के समान कांतिवान है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी लिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी दस भुजाएं हैं और दसों भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र हैं। देवी के हाथों में कमल, धनुष-बाण, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र धारण किए हुए हैं। इनके कंठ में सफेद पुष्प की माला और रत्नजड़ित मुकुट शीर्ष पर विराजमान है। देवी चंद्रघंटा भक्तों को अभय देने वाली तथा परम कल्याणकारी हैं। इनके रुप और गुणों के अनुसार आज इनकी पूजा की जाएगी।


पूजा के मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

ऊँ चं चं चं चंद्रघंटायेः ह्रीं नम:।

प्रसाद - शहद, मावे की मिठाई, दूध, खीर और दूध से बनी मिठाईयां।

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