तीज-त्योहार / रंभा तीज 25 मई को, अप्सरा रंभा के कारण पड़ा इस व्रत का नाम

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  • पति की लंबी उम्र और संतान सुख के लिए सौलह श्रंगार कर के महिलाएं रखती हैं ये व्रत

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 02:16 AM IST

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रंभा तृतीया व्रत या कहें रंभा तीज व्रत किया जाता है। इस साल ये व्रत 25 मई को है। सोमवार होने से इस दिन शिव-पार्वती पूजा का महत्व और भी बढ़ जाएगा। सुहागन महिलाएं सौभाग्य के लिए ये व्रत रखती हैं। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सौभाग्य और संतान सुख की इच्छा से ये व्रत करती हैं। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती के साथ लक्ष्मी जी की पूजा भी की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार अप्सरा रंभा ने इस व्रत को किया था। इसलिए इसे रंभा तीज कहा जाता है।

सौलह श्रंगार करती है महिलाएं
इस व्रत में महिलाएं सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करती हैं। तीर्थ स्नान या पानी में गंगाजल मिलाकर नहाती हैं। इस दिन महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और सोलह श्रंगार करती हैं। इस व्रत में मेहंदी लगाने का विशेष महत्व है। रंभा तीज के व्रत में महिलाएं सौभाग्य सामग्रियों यानी श्रंगार की चीजों का दान भी करती हैं। इसके अलावा इस व्रत में मिट्‌टी के बर्तन में जलभर कर दान करने का भी बहुत महत्व है। लक्ष्मीजी और देवी पार्वती की पूजा में सौभाग्य सामग्री अर्पित करती हैं। इस दिन मंदिर और घर पर ही शिव, पार्वती और गणेश जी की आराधना करके घर में बड़ों से आशीर्वाद लिया जाता हैं। घर की बड़ी महिला को श्रंगार की चीजें और मिठाई दी जाती है।

रम्भा तृतीया व्रत का विधान
सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। इसके बाद पूर्व दिशा में मुंहकर के पूजा के लिए बैठें। भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें। उनके आसपास पूजा में पांच दीपक लगाएं। इसके बाद पहले गणेश जी की पूजा करें। फिर इन 5 दीपक की पूजा करें। इनके बाद भगवान शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पूजा में देवी गौरी यानी पार्वती को कुमकुम, चंदन, हल्दी, मेहंदी, लाल फूल, अक्षत और अन्य पूजा की सामग्री चढ़ाएं। भगवान शिव गणेश और अग्निदेव को अबीर, गुलाल, चंदन और अन्य सामग्री चढ़ाएं।

व्रत का महत्व
रंभा तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य मिलता है। पति की उम्र बढ़ती है। संतान सुख मिलता है। इस दिन व्रत रखने और दान करने से मनोकामना पूरी होती है। रंभा तीज करने वाली महिलाएं निरोगी रहती हैं। उनकी उम्र और सुंदरता दोनों बढ़ती हैं। जिस घर में ये व्रत किया जाता है। वहां समृद्धि और शांति रहती है।

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