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उरलुंग में मनाया गया हूल दिवस

उरलुंग गांव में शनिवार को 163वां हूल दिवस मनाया गया। इस दौरान सिदो-कान्हू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी...

Danik Bhaskar | Jul 01, 2018, 02:00 AM IST
उरलुंग गांव में शनिवार को 163वां हूल दिवस मनाया गया। इस दौरान सिदो-कान्हू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता आदिवासी छात्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष छोटेलाल करमाली ने की व संचालन सुभाष उरांव ने किया।

इस अवसर पर करमाली ने इनके बताए मार्गो पर चलने का संकल्प लिया। कहा कि सिदो -कान्हू ने संथालों के लिए यह एलान किया था कि करो या मरो। अंग्रेजी हुकूमत हमारा देश छोड़ो अब हम मालगुजारी नहीं देंगे। इससे घबरा कर अंग्रेजी सरकार विद्रोहियों का दमन करने लगी । अंग्रेजी हुकूमत सिदो कान्हू को पकड़ने के लिए जमीदारों और अपने सिपाहियों के साथ मिलकर सिदो-कान्हू को पकड़ने के लिए भेजा जिसे संथालों ने मौत के घाट उतार दिया । इससे घबरा कर अंग्रेजी हुकूमत सेना को बुलाकर सिदो व कान्हू को पकड़ कर 26 जुलाई 1855 को भोगनाडीह गांव में पेड़ से लटकाकर फांसी की सजा दी गई । इन्हीं शहीदों की याद में प्रत्येक साल 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है । मौके पर रामबिलास मुंडा, सुनील मुंडा, वार्ड सदस्य गीता देवी, संदीप उरांव, संजय राम रविंद्र मुंडा, संतोष उरांव, मुकेश मुंडा, रामप्रसाद मुंडा, तूफान उरांव, सरोज देवी, सीमा देवी, मुनिया देवी, रूपमनी देवी, सुमन देवी आदि उपस्थित थे।