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बरकाकाना-रांची रेललाइन से बदलेगी दर्जनों गांवों की तस्वीर

रेलवे की बरकाकाना-रांची महत्वाकांक्षी योजना ग्रामीणों और किसानों के लिए वरदान साबित होगी। भदानीनगर के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 09, 2018, 02:05 AM IST

बरकाकाना-रांची रेललाइन से बदलेगी दर्जनों गांवों की तस्वीर
रेलवे की बरकाकाना-रांची महत्वाकांक्षी योजना ग्रामीणों और किसानों के लिए वरदान साबित होगी। भदानीनगर के सुदूरवर्ती पहाड़ों की तलहटी में बने सांकी रेलवे स्टेशन से यहां के किसान अपनी सब्जियों और अन्य उत्पादों को आसानी से राजधानी रांची की मंडी में बेच सकेंगे। साथ ही स्टेशन के पास भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अभी यहां के किसान अपनी सब्जियों को बेचने के लिए साइकिल से पहाड़ों और जंगलों की टूटी-फूटी सड़कों से दो घंटे का सफर तय कर भुरकुंडा बाजार जाते हैं। इस दौरान किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, साथ ही जान-माल का डर भी बना रहता है। अपनी उपज बेचने के लिए किसानों को रोज 10 से 18 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है जिसमें उनका काफी समय आने और जाने में ही बर्बाद हो जाता है। इससे तंग आकर कुछ किसान मंडी पहुंचने से पहले ही रास्ते में अपना सामान औने-पौने दामों पर बेच देते हैं।

सैकड़ों किसान रांची की मंडी में बेचेंगे अपने उत्पाद

दुर्गम पहाड़ पर बने सांकी रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन।

शिक्षा व रोजगार के लिए भटकने की जरूरत नहीं, राजधानी से जुडे़ंगे दुर्गम गांव

स्टेशन के नजदीक के गांव वालों को मिलेगा रोजगार : सांकी स्टेशन के समीप बसे गांव के लोगों को आर्थिक रूप से लाभ होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल का परिचालन होने से स्टेशन पर यात्रियों को आना-जाना लगा रहेगा। जिससे नजदीक के ग्रामीण यहां दुकान खोलकर रोजगार कर सकते हैं। साथ ही यहां के किसान रेल के माध्यम से रांची मंडी में जाकर अपने उत्पादों को अच्छी कीमत पर बेच सकेंगे। स्टेशन के समीप के गांव ओरियातु, चिट्टो, सिलदाग, अमझरिया, सुथरपुर, होन्हे टांड, सालगो, लोवाडीह, निम्मी, करमचंथी और सांकी के ग्रामीणों को काफी फायदा होगा।

ट्रेन से सब्जियों को ले जाएंगे राजधानी के बाजार में

अमझरिया गांव के प्रकाश टोप्पो कहते है कि अब गांव में उगने वाली सब्जी को रांची बाजार में बेचने में आसानी होगी। अभी भुरकुंडा बाजार में सब्जी बेचने के लिए साइकिल से जाता हूं, जिसके कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आरियातु की शिक्षिका समंची देवी का कहना है कि अब गांव के पास से ही ट्रेन जायेगी जिसमें बीमारों को रांची ले जाकर इलाज कराना आसान हो जाएगा। ओरियातु गांव के आईटीआई छात्र योगेंद्र उरांव का कहना है कि अब पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीण बच्चे भी ट्रेन से शहर जाकर अच्छी शिक्षा ग्रहण करेंगे।

साइकिल पर भुरकुंडा सब्जी ले जाता किसान।

प्रकाश टोप्पो।

समंची देवी।

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