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सिदो कान्हू ने भोगनाडीह में अबुआ राज की नींव रखी थी

कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुत करती महिलाएं और उपस्थित भीड़। भास्कर न्यूज| भुरकुंडा भुरकुंडा में बिरसा चौक...

Danik Bhaskar | Jul 01, 2018, 02:05 AM IST
कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुत करती महिलाएं और उपस्थित भीड़।

भास्कर न्यूज| भुरकुंडा

भुरकुंडा में बिरसा चौक रामनवमी मैदान में कोल इंडिया मांझी परगना महल ने शनिवार को हूल दिवस धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कोल इंडिया मांझी परगना महल के राष्ट्रीय महासचिव रामचन्द्र मुर्मू, सह सचिव उमापद मुर्मू उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर और सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इसके बाद आदिवासी महिलाओं ने मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।

इसके बाद जेएम काॅलेज एनएसएस के छात्रों ने सिदो कान्हू की जीवनी पर आधारित नाटक का मंचन किया। स्वागत भाषण कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप मांझी ने किया। राष्ट्रीय महासचिव रामचन्द मुर्मू ने कहा कि संथाल हूल के महानायक सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू ने आज से 161 साल पहले भोगनाडीह में अबुआ राज की नींव रखी थी। दोनों भाइयों ने अपना अधिकार पाने के लिए हूल को जो रास्ता दिखाया। उसी रास्ते पर चलकर हमारा झारखंड राज्य बना है। संथाल ही नहीं पूरे झारखंड के इतिहास में 30 जून 1855 महत्वपूर्ण है। इसी दिन सिदो कान्हू के नेतृत्व में भोगनाडीह में महाजनों और अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह शुरू हुआ था।

इनकी संथाल सेना ने तीर धनुष की बदौलत अंग्रेजी सेना का डटकर सामना किया था। उन्होंने कहा कि हमें इन महान जन नायकों के आदर्शों पर चलकर अपनी परंपरा को बचाने के लिए हूल का बिगुल फूंकना होगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में सोहराय किस्कू, शंकर मुर्मू, कृष्णा मुर्मू, अमन हेम्ब्रम, मनोज, महादेव, बिहारी मांझी, लालजी सोरेन, ब्रह्मदेव मुर्मू, मनोज मांझी, जयवीर हांसदा, मानेंद्र हेम्ब्रम, मानकी टुडू, छोटेलाल हेम्ब्रम, धनीराम बास्के, चेतो हेम्ब्रम, शीला देवी, सबिता देवी, विनीता, ममता, ननकी, सरस्वती, अन्नु, मुन्नी, कपूर मुनी, हीरा देवी सहित दर्जनों महिला पुरुष शामिल थे।