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सरकारी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी बनाने के लिए भेजा 45 लाख का बायोमैट्रिक्स, छह माह से पेटी में बंद पड़े हैं

Bokaro News - राजेश सिंह देव

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:10 AM IST
सरकारी स्कूलों में बच्चों की हाजिरी बनाने के लिए भेजा 45 लाख का बायोमैट्रिक्स, छह माह से पेटी में बंद पड़े हैं
राजेश सिंह देव
झारखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति जानने और मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी रोकने के लिए सभी स्कूलों में बायोमैट्रिक्स लगाने की योजना बनाई थी। इसके तहत स्कूली बच्चों की हाजिरी बायोमैट्रिक्स से बनाना था। बोकारो जिले के 1725 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में लगवाने के लिए सरकार ने 1780 बायोमैट्रिक्स मशीन भेज दिया। लेकिन ये मशीन जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में छह माह से पेटियों में बंद हैं। जबकि जिले के 35 उच्च विद्यालयों में बायोमैट्रिक्स मशीन लगा दिए गए हैं। एक बायोमैट्रिक्स मशीन की कीमत 2500 से लेकर 10 हजार रुपए तक है। 2500 रुपए के हिसाब से इन मशीनों की कीमत 44.50 लाख रुपए है। जो बेकार पड़े हैं।

बायोमैट्रिक्स भेज दिया, ट्रेनिंग देना भूल गई सरकार

सरकार ने बायोमैट्रिक्स तो दे दिया, लेकिन इसे चलाने के लिए ट्रेनिंग दिलाना भूल गई। इसके तहत सीआरपी, बीआरपी और शिक्षकों को ट्रेनिंग देना था। बायोमैट्रिक्स को टैब से कनेक्ट कर बच्चों की हाजिरी बनवानी है। ताकि बच्चों की सही उपस्थिति का आंकड़ा सरकार के पास रहे। टैब में ही स्कूलों का डेटा रहेगा। अटेंडेंस और इनरोलमेंट की पूरी जानकारी एक क्लिक पर सरकार को मिलेगी। लेकिन ट्रेनिंग नहीं दिए जाने के कारण किसी स्कूल में अभी तक बायोमैट्रिक्स नहीं लगाए गए।

डीएसई कार्यालय में पेटी में बंद बायोमैट्रिक्स मशीन।

मध्याह्न भोजन में शिक्षक करते हैं

गड़बड़ी

मध्याह्न भोजन में कई स्कूलों के शिक्षक गड़बड़ी करते हैं। स्कूलों से विभाग को मिलने वाली रिपोर्ट में उपस्थिति का आंकड़ा अलग और मध्याह्न भोजन खाने वाले छात्रों का आंकड़ा अलग होता है। कई स्कूलों से ऐसी गड़बड़ी मिलने के बाद सरकार ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए बायोमैट्रिक्स से बच्चों की हाजिरी बनवाने की योजना बनाई। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना खटाई में चली गई। जैसा शिक्षक चाहते हैं वैसा ही चल रहा है।

जिले के 1725 सरकारी विद्यालयों में 2.55 लाख बच्चे

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 1725 सरकारी विद्यालयों 255962 बच्चे नामांकित हैं। लेकिन औसतन 1.62 लाख बच्चे ही स्कूल आते हैं। जबकि वास्तविक उपस्थिति और कम है। बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाकर स्कूल कमेटियां मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी करते हैं। बताया जाता है कि जिले में 1771 मध्य और प्राथमिक विद्यालय थे, 46 स्कूलों के समायोजन के बाद 1725 बचे हैं। इनमें क्लास एक से पांच तक के 169615 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन औसतन 1.11 लाख बच्चे ही स्कूल आते हैं। जबकि क्लास छह से आठ तक के 86347 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन औसतन 51 लाख बच्चे ही स्कूल आते हैं।

ट्रेनिंग के बाद ही मशीन लगेगी : डीएसई

सरकार ने बायोमैट्रिक्स मशीन तो भेज दिया, लेकिन ट्रेनिंग नहीं दिया गया है। इसमें स्कूल के शिक्षकों, संकुल के सीआरपी और बीआरपी को ट्रेनिंग दिया जाएगा। उसके बाद बायोमैट्रिक्स को टैब से कनेक्ट किया जाएगा। तभी बच्चों का अटेंडेंस बायोमैट्रिक्स से बनेगा। जब तक सरकार ट्रेनिंग नहीं दिलाती है, तब तक मशीन नहीं लगवाया जा सकता है। इसमें जिला शिक्षा विभाग कुछ नहीं कर सकता है। बायोमैट्रिक्स भी विभाग से ही भेजा गया है। 

वीणा कुमारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, बोकारो।

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