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74 लाख का ग्राम संसद और सांस्कृतिक अखाड़ा हो गया जर्जर

विपिन मुखर्जी

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
विपिन मुखर्जी
पेटरवार प्रखंड के चांदो पंचायत को 2014 में झारखंड सरकार ने आदर्श पंचायत घोषित किया था। लेकिन आदर्श पंचायत बनने के बाद यहां कुछ हो या न हो एक से बढ़कर एक आलीशान भवन बने और सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ। 47 लाख की लागत से कुशलबंधा गांव में ग्राम संसद भवन और 27 लाख की लागत से सांस्कृतिक कार्यक्रम अखाड़ा का निर्माण करवाया गया। लेकिन इनका उपयोग साल में दो बार ही होता है,रास मेला और सरस्वती पूजा में, बाकी दिनों में इसमें ताला बंद रहता है। सबसे मजेदार बात यह है कि बनने के बाद यह भवन बिना उपयोग के ही जर्जर हो गया, लेकिन इस जर्जर भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री से ऑनलाइन करा दिया गया। मामला उजागर होते ही अधिकारियों ने जर्जर भवन की मरम्मत तो करा दी, लेकिन जैसे-तैसे मरम्मत करवाए जाने के कारण भवन में फिर से दरार आ गई। बीडीओ जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं।

ग्राम संसद भवन व सांस्कृतिक अखाड़ा व इनसेट में भवन के दीवार में आई दरार।

बीडीओ इंदर कुमार ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि चांदो को आदर्श पंचायत बनाया गया है। इसकी जानकारी वह मुखिया से लेंगे। साथ ही संसद भवन और सांस्कृतिक अखाड़ा के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। इसके लिए वह रिपोर्टर को विशेष शाखा से जानकारी लेने की सलाह दे रहे हैं।

आदर्श पंचायत के ग्रामीण कहते हैं कि सरकारी पैसों की लूट हुई, बीडीओ को पता नहीं, मुखिया कहते हैं हैंड ओवर नहीं मिला

बीडीओ को पता नहीं आदर्श पंचायत के बारे में

ग्राम संसद भवन एवं सांस्कृतिक अखाड़ा का निर्माण होने के बाद ठेकेदार ने बीडीओ को हैंड ओवर किया। पंचायत को हैंडओवर नहीं मिला है। चाबी किसके पास है, इसकी जानकारी भी मुझे नहीं है। अगर बीडीओ ग्राम संसद एवं संस्कृति अखाड़ा पंचायत को देंगे, तो इसका सही देखरेख होगा।  राजेंद्र कुमार नायक, मुखिया चांदो पंचायत

पंचायत को हैंडओवर नहीं मिला

बनने के साथ ही दीवारों में पड़ने लगी थी दरारें

ग्रामीणों ने बताया कि अगस्त 2013 में तत्कालीन मंत्री राजेंद्र सिंह ने इसका शिलान्यास किया था। वित्तीय वर्ष 2013- 14 में भवन का निर्माण शुरू हुआ और 2015 में पूर्ण हो गया। 2016 में ही भवन की दीवारों पर दरार आने लगी। 2016 में मरम्मत करवाई गई, फिर 2018 में भवन जर्जर हो गया। ग्रामीणों ने उपायुक्त को पत्र लिखकर बताया कि ठेकेदार द्वारा जैसे-तैसे भवन बना दिए जाने के कारण एक वर्ष में ही ग्राम संसद भवन जर्जर हो गया और उसका आनन-फानन में ऑनलाइन उद्घाटन भी मुख्यमंत्री से करा दिया गया। इसके बाद उपायुक्त ने संज्ञान लिया और उन्होंने एक विशेष जांच टीम गठित कर जर्जर भवन की जांच करवाई। जांच टीम में ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के बोकारो जिला उपाध्यक्ष लक्ष्मण कुमार नायक, सहायक व कनीय अभियंता आदि शामिल थे। विशेष टीम ने जांच के दौरान भवन निर्माण के ठेकेदार को सख्त निर्देश दिया कि 15 दिन के अंदर भवन की मरम्मत करवाई जाए, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ठेकेदार ने फाइनल बिल निकालने के लिए जर्जर भवन की लीपापोती कर दी। जर्जर दरवाजों को जैसे-तैसे मरम्मत कर गड़बड़ी छिपाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने निर्देश दिया था कि दीमक लग चुके लकड़ी के दरवाजों को बदलकर लोहे का दरवाजा लगाया जाए, लेकिन ठेकेदार ने नहीं लगवाया। गांव के बैजनाथ नायक, रमित रजक, राजकुमार, प्रदीप आदि ने बताया कि ठेकेदारों ने पेटी में काम देकर ग्राम संसद भवन की गुणवत्ता को दरकिनार किया। चांदो पंचायत के लिए निर्मित संसद भवन व सांस्कृतिक भवन महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। इसकी उपयोगिता के पूर्व भवन कि बेहतर मरम्मत की जरूरत है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम संसद भवन और सांस्कृतिक अखाड़ा का इस्तेमाल रास मेला व सरस्वती पूजा के दिन ही होता है। इसके अलावा सालभर यह भवन बंद ही रहता है।