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मुखिया ने 18 डीप बोरिंग पर खर्च किए 72 लाख, 395 की जगह 150 फीट की बोरिंग

राजेश सिंह देव

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
मुखिया ने 18 डीप बोरिंग पर खर्च किए 72 लाख, 395 की जगह 150 फीट की बोरिंग
राजेश सिंह देव
चंदनकियारी प्रखंड के अड़िता पंचायत की मुखिया बिजली देवी और बीडीओ रवींद्र कुमार गुप्ता पर लाखों रुपए गड़बड़ी का आरोप लगा है। 2016-17 में इस पंचायत में करीब 72 लाख की लागत से 18 डीप बोरिंग कराए गए थे। गांव में इमामुद्दीन अंसारी ने आरटीआई से सूचना मांगकर इस मामले की शिकायत अप्रैल 2017 में डीसी से की। जांच शुरू हुई। कार्यपालक दंडाधिकारी मेनका ने दिसंबर 2017 में जांच की। रिपोर्ट में उन्होंने डीप बोरिंग की जांच पीएचईडी से कराने सहित इंदिरा आवास आवंटन, जेनरेटर, कंप्यूटर और सोलर लाइट खरीदारी में भी सवाल खड़े किए हैं।

यह है आरोप

इमामुद्दीन ने डीसी से किए शिकायत में कहा है कि इस पंचायत में चापानल लगाने का आदेश था, लेकिन डीप बोरिंग करवाया गया। लाभुक समिति को राशि खर्च करने का आदेश था, लेकिन कनीय अभियंता विनोद मंडल ने राशि निकासी की। इस्टीमेट बनाने वाले कनीय अभियंता को ही अभिकर्ता बनाया गया, उसी ने मापी पुस्तिका भी भरी। अध्यक्ष, सचिव ग्रामीणों का बनाना था, लेकिन नहीं बनाया गया। एक डीपी बोरिंग का इस्टीमेट चार लाख रुपए है, इसमें 395 फीट बोरिंग करना था, लेकिन 150 फीट ही बोरिंग किया गया। केसिंग-लोरिंग भी नहीं डाला गया। पानी टंकी की गुणवत्ता सही नहीं है, दरार पड़ने लगी है। इसमें पंचायत सेवक मोहन महतो और रोजगार सेवक संजीव ओझा भी शामिल हैं। इसके अलावा मुखिया के ससुर को सरकारी नौकरी करते हुए इंदिरा आवास लेने, टैंकर खरीदारी में गड़बड़ी, मनरेगा की योजनाओं में भ्रष्टाचार सहित कई आरोप लगाया है। यह एक पंचायत का मामला है, इस तरह प्रखंड के 38 पंचायतों में सरकारी राशि की गड़बड़ी की गई है। अंसारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने गड़बड़ी की सूचना मांगी, तो उनपर अनुसूचित जाति उत्पीड़न का केस कर दिया गया और मामला वापस लेने के लिए दबाव दिया जाने लगा। लेकिन उन्होंने मामला वापस नहीं लिया।

2016 में की गई गड़बड़ी, 2017 में शिकायत, अभी तक चल रही है जांच

दो साल से ठाकुर कुल्ही में बेकार पड़ा डीप बोरिंग ।

जांच में कई मामलों पर सवाल उठे

कार्यपालक दंडाधिकारी मेनका ने 28 जून 2017 को डीडीसी को रिपोर्ट दी। इसमें कहा कि डीप बोरिंग की गहराई पर सवाल है, इसलिए इसकी और पानागढ़ से खरीदे गए पानी टैंकर की पीएचईडी से तकनीकी जांच करना उचित होगा। इसके अलावा मुखिया, पंचायत सेवक और रोजगार सेवक द्वारा खरीदे गए 136 सोलर लाइट की जांच सरकारी गाइडलाइन के अनुसार की गई है या नहीं, इसके कागजात नहीं दिखाए गए, बीडीओ इसकी जांच करवा सकते हैं। मुखिया के ससुर पर सरकारी नौकरी में रहकर इंदिरा आवास का लाभ लेने का आरोप है, तो इस मामले में राशि वसूली की जा सकती है। इसके अलावा मुखिया के घर में लगे जेनरेटर को पंचायत भवन में शिफ्ट कराने और इनवर्टर, बैटरी, फर्नीचर आदि कहां और किस स्थिति में हैं, इसका स्टॉक पंजी नहीं दिखाया गया। इसकी बीडीओ से जांच करवाई जा सकती है।

डीडीसी ने बीडीओ से मांगा स्पष्ट प्रतिवेदन

उप विकास आयुक्त रवि रंजन मिश्रा ने 19 फरवरी 2018 को चंदनकियारी के बीडीओ को कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा दिए गए जांच रिपोर्ट के आधार पर बिंदुवार स्पष्ट प्रतिवेदन देने के लिए कहा है। ताकि इनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा सके।

रघुनाथ टांड़ में अधूरा डीप बोरिंग।

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