Hindi News »Jharkhand News »Bokaro News» सरकारी एंबुलेंस में फर्स्ट एड बॉक्स तो दूर थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर भी नहीं

सरकारी एंबुलेंस में फर्स्ट एड बॉक्स तो दूर थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर भी नहीं

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:35 AM IST

अशोक विश्वकर्मा
अशोक विश्वकर्मा बोकारो

जिले में सिर्फ दस्तावेजों में ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। हकीकत कोसों दूर है। जिला को स्वस्थ बनाना तो दूर स्वास्थ्य महकमें के एक अदद सुविधा भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं कराई गई है। इनकी लापरवाही के कारण जिले के कई सरकारी एंबुलेंस में आज तक फर्स्ट एड बॉक्स तो दूर एक मामूली सा थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।

ऐसे में अगर आपात स्थिति में किसी मरीज का बुखार व डायबिटीज जांचने की आवश्यकता पड़ती है, तो चिकित्सा पदाधिकारी इधर-उधर झांकने लगते हैं। ऐसे में तत्काल इलाज उपलब्ध करवाना मुश्किल हो जाता है।

यह होती है परेशानी

अगर आपात स्थिति में किसी मरीज के बुखार और डायबिटीज मापने की नौबत आती है, तो मरीज को इस मामूली सी जांच के लिए वहां से दस बारह किलोमीटर दूर किसी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में भेजना पड़ जाता है। सदर अस्पताल बोकारो और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चास में दो बड़े एंबुलेंस हैं। जिन्हें आपात स्थिति में कहीं भी भेजा जाता है। पर इन दोनों ही एंबुलेंस की स्थिति ऐसी है कि दोनों में ही थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर तक उपलब्ध नहीं है।

एंबुलेंस के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।

पावरग्रिड के एंबुलेंस में भी न थर्मामीटर न ग्लूकोमीटर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चास के पावरग्रिड ऑफ इंडिया लिमिटेड के एंबुलेंस में भी न तो थर्मामीटर उपलब्ध है और न ही ग्लूकोमीटर। चूंकि पीजीआई की ओर से चास सीएचसी को डोनेट किया गया वाहन में 407 को ही एंबुलेंस की बॉडी बना दी गई है। इससे मरीजों को लाने और ले जाने में काफी परेशानी होती है। इस एंबुलेंस से मरीजों को लाने और ले जाने में पीछे काफी झटका लगता है। अगर मरीज की हडि्डयां टूटी हुई है तो इसमें उसे और ज्यादा परेशानी होगी।

सदर अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस।

104 नंबर में न थर्मामीटर, न ग्लूकोमीटर

सदर अस्पताल के एंबुलेंस 104 को आपात स्थिति के लिए रखा गया है। ताकि किसी भी आपात स्थिति में इसे तुरंत घटनास्थल पर लेकर पहुंचा जा सके। इस एंबुलेंस में बुखार मापने के लिए न तो थर्मामीटर उपलब्ध है और न ही ग्लूकोमीटर। ऐसे में आपात स्थिति में न तो मरीज का तापमान ही पता चल पाता है और ना ही उसका डायबिटीज। इस वजह से सिर्फ तापमान और डायबिटीज की जांच के लिए अस्पताल लाना पड़ता है।

जल्द ही थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर रखा जाएगा : सीएस

जिस एंबुलेंस में थर्मामीटर और ग्लूकोमीटर या फ़र्स्ट एड बॉक्स नहीं है, उसमें जल्द ही इसकी व्यवस्था करने का निर्देश देंगे। हालांकि जब आपात स्थिति में टीम जाती है तो फस्ट एड का बॉक्स लेकर जाती है। हां, अनिवार्य रूप से ग्लूकोमीटर और थर्मामीटर रखना सुनिश्चित करने का निर्देश सभी प्रभारियों को देंगे। 

डॉ. सोवान मुर्मू, सिविल सर्जन, बोकारो

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Bokaro News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: सरकारी एंबुलेंस में फर्स्ट एड बॉक्स तो दूर थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर भी नहीं
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      More From Bokaro

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×