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सरहुल संस्कृति और प्रकृति से आदिवासियों के लगाव का है परिचायक : टिकैत महतो

एक वर्ष पहले
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नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट अंतर्गत पलामू पंचायत के बड़काडीह रखवा मोड़ स्थित सरना स्थल में आदिवासी समाज की ओर से सरहुल पर्व परंपरागत तरीके मनाया गया। पारंपरिक तरीके से नायके बाबा कर्मा टुडू, कूडाम नायके रूपलाल टुडू, मांझी बाबा बसराम टुडू, पुराणिक बाबा महाजन सोरेन, जोग मांझी बाबा पगला सोरेन ने पारंपरिक ढंग से सखुआ, प्लास एवं महुआ फूल से मारंग बुरु की पूजा अर्चना की। इसके बाद मांदर की थाप पर आदिवासी महिला-पुरुषों ने नृत्य किया। यहां जुग जाहेर सरना समिति की ओर से सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता नारायन मरांडी ने की तथा संचालन रामलाल मरांडी ने किया। सभा में मुख्य रूप से मुख्य अतिथि जिप सदस्य टिकैत कुमार महतो, पलामू पंचायत मुखिया बेबी कुमारी, पंसस संगीता हेंब्रोम, उप मुखिया भागीरथ महतो, ग्राम प्रधान हरी महतो, झामुमो नेता बृजलाल हांसदा, झरीलाल हांसदा मौजूद थे। जिप सदस्य महतो ने कहा कि आदिवासी संस्कृति आदिवासियों के पर्व एवं पूजा-पाठ प्रकृति से जुड़ा हुआ है। सरहुल पर्व हमारी संस्कृति एकता व प्रकृति से आदिवासियों के लगाव का परिचायक है।

सभा को संबोधित करते जिप सदस्य टिकैत कुमार महतो व मंचासीन अन्य।
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