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सेल को लाभ में लाना फिलहाल मुश्किल फाइंस बेचने की प्रक्रिया भी बेहद धीमी

एक वर्ष पहले
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बीएसएल सहित सेल कर्मियों को वेज रिवीजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि फाइंस ओपन मार्केट में बेचने की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। जिसके कारण उससे होने वाली आय का उल्लेख वर्तमान वित्त वर्ष की बैलेंस सीट में नहीं हो पाएगा। जिसका असर कंपनी की आय पर होगा। आय की घटने पर प्रबंधन के लिए वेज रिवीजन पर जुलाई तक किसी नतीजे पर पहुंच पाना इतना आसान नहीं होगा। अब तक सेल प्रबंधन इस उम्मीद के साथ जुलाई-अगस्त तक वेज रिवीजन को अंतिम रूप देने की बात कहा रहा था, क्योंकि दिसंबर से स्टील मार्केट में उछाल आ चुका था। जिसका असर अंतिम तिमाही पर जबर्दस्त प्रॉफिट के रूप में सामने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन फरवरी में चीन में फैले कोरोना वायरस के कारण स्टील मार्केट के एक बार फिर मंदी की चपेट में आने से प्रबंधन को बड़ा झटका लगा है। वहीं प्रक्रिया धीमी होने से भी वर्तमान वित्त वर्ष में होने वाली उसकी आय पर असर पड़ा है।

अब आवक अगले वर्ष की बैलेंस शीट में जमा होगी

फाइंस बेचने की धीमी प्रक्रिया का असर यह हुआ कि जो आवक वर्तमान वित्त वर्ष के बैलेंस सीट में आ जाता है, वह अब अगले वित्त वर्ष के सीट में शामिल होगा। इससे अगले वर्ष के कंपनी के प्रॉफिट में राजस्व आय का एक और स्रोत जुड़ जाएगा।

दो एमटी फाइंस बेचने की टेंडर अभी प्रक्रिया में

सेल प्रबंधन ने दो अलग-अलग माइंस से एक-एक एमटी फाइंस बेचने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। प्रबंधन अपने कैप्टिव माइंस से कुल 20 एमटी फाइंस बेचने की योजना बना रहा है। इससे 17 हजार करोड़ जुटेंगे।

ओडिशा ने दी है मंजूरी, झारखंड में इंतजार

ओडिशा और झारखंड में प्रबंधन ने अलग-अलग माइंस से 1.76 लाख टन फाइंस बेचने के लिए टेंडर किया है, लेकिन अब तक बीड नहीं खोली गई है। वहीं बेचने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी लेनी है, ओडिशा सरकार ने मंजूरी दी है, झारखंड सरकार की मंजूरी बाकी है।

चेयरमैन ने भी माना कारोबार प्रभावित

स्टील मार्केट में कोरोना वायरस से प्रभावित होने की बात सेल चेयरमैन अनिल चौधरी भी स्वीकार कर चुके हैं। वायरस से आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहा।
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