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जिन पारा शिक्षकों की वजह से रुका ड्राप आउट, उन्हीं के साथ भेदभाव

सुरेन्द्र सावंत

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:15 AM IST
सुरेन्द्र सावंत
जिन पारा शिक्षकों की कड़ी मेहनत की बदौलत सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ ड्राप आउट बच्चों की संख्या में कमी आई, आज उन्हीं पारा शिक्षकों के साथ विभाग की ओर से भेदभाव किया जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण यह है कि हाल ही में शिक्षा सचिव की ओर से आदेश जारी कर कहा गया कि टेट पास पारा शिक्षकों को प्रति माह मिलने वाली अतिरिक्त 300 रुपए की राशि अब नहीं दी जाएगी। इसके अलावा रेशनलाइजेशन के नाम पर उनका भी स्थानांतरण किया जा रहा है।

इन सुविधाओं में हो रही कटौती

पारा शिक्षकों की बहाली जब से हुई, उस समय से पारा शिक्षकों द्वारा अपने आसपास के बच्चों को प्रेरित कर स्कूल लाने का काम किया गया। वहीं जो बच्चे स्कूल नहीं आते थे, उनके घर जाकर पारा शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से मिलकर अपने बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया करते थे। उन्हीं की बदौलत स्कूलों में ड्राप आउट बच्चों की संख्या बिल्कुल घट गई। आज उन्हीं की सुविधाओं में कटौती सहित कई तरह के भेदभाव बरते जा रहे हैं। टेट पास पारा शिक्षकों को पहले प्रति माह मानदेय की राशि के साथ अतिरिक्त 300 रुपए मिलते थे। लेकिन अब उस राशि की कटौती कर दी गई। इतना ही नहीं विभागीय अधिकारियों की ओर से अभी हाल में यह आदेश जारी कर कहा गया कि वर्ष 2008 से बहाल हुए पारा शिक्षकों को हटाया जाएगा।

जिले के कई स्कूलों में पारा शिक्षकों के भरोसे है बच्चों की पढ़ाई।

अब रेशनलाइजेशन के नाम पर किया गया तबादला

अब रेशनलाइजेशन के नाम मात्र आठ हजार रुपए मानदेय पाने वाले पारा शिक्षकों का भी तबादला कर दिया गया है। बोकारो जिले में भी 305 पारा शिक्षकों का तबादला किया गया है। एक तो पारा शिक्षकों को समय पर मानदेय नहीं मिलता है। चार और पांच महीने पूरे होने के बाद उन्हें मात्र दो महीने का ही मानदेय दिया जाता है। तब तक पारा शिक्षक अपनी पेट भरने के लिए कर्ज में फंस चुके होते हैं। तबादले के बाद जिन पारा शिक्षकों की स्कूली की दूरी उनके घर से 30 से 40 किलोमीटर दूरी पर होगी, ऐसे में उन्हें स्कूल जाने-आने में प्रतिदिन काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

नावाडीह में किया था अनशन

रेशनलाइजेशन के विरोध में सात सितंबर से नावाडीह प्रखंड के सुरही में पारा शिक्षकों ने अनशन किया था। वे अपनी या निकटवर्ती पंचायत के स्कूल में ही रखे जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन विभाग ने निकटवर्ती पंचायतों की रिक्तियां नहीं दर्शायीं।

उनके आंदोलन को झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ का नैतिक समर्थन प्राप्त था। अनशन पर बैठे पारा शिक्षकों की हालत जब खराब होने लगी तो डूमरी विधायक जगन्नाथ महतो ने उनलोगों को न्याय का आश्वासन देकर अनशन को तुड़वाया।

केस- एक

पारा शिक्षकों की बदौलत मॉडल स्कूल बनने के कगार पर हैं कई विद्यालय

उत्क्रमित मध्य विद्यालय आजाद नगर में दो सरकारी व नौ पारा शिक्षक कार्यरत हैं। कार्यरत पारा शिक्षकों की कड़ी मेहनत की बदौलत आज मध्य विद्यालय आजाद नगर सुर्खियों में है। उसे मॉडल स्कूल बनाने का प्रस्ताव भी विभाग के पास है। वहां पर शैलेंद्र कुमार, अजय प्रसाद गुप्ता, अशोक कुमार, हरेंद्र कुमार सिंह, सूर्यनाथ सिंह, मोमिता कच्छप, अनिता देवी, निशा कुमारी और कुमारी मीनाक्षी बतौर पारा शिक्षक कार्यरत हैं। बच्चों की पढ़ाई में इनकी अहम भूमिका हैं। 300 रु. अतिरिक्त राशि की कटौती से वे चिंतित हैं।

तबादला व मानदेय सरकारी स्तर से होता है

यह मेरा मामला नहीं है। यह सरकार का मामला है। सरकार क्यों नहीं मानदेय दे रही है। यह सरकार से पूछें। सरकार के आदेश पर ही पारा शिक्षकों का तबादला किया गया है। 

वीणा कुमारी, डीएसई, बोकारो।

केस- दो

उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिवनडीह हिंदी में हैं छह पारा शिक्षक

उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिवनडीह हिंदी स्कूल में दो सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि उस विद्यालय में छह पारा शिक्षक कार्यरत हैं। जिनकी बदौलत उस स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। उस स्कूल में कुल छात्र संख्या 221 है। जिन्हें पढ़ाने-लिखाने से लेकर स्कूल नहीं आने पर उनके घरों में जाकर उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करने का काम भी करते हैं। वहां पर सरस्वती कुमारी, शिवानी सरकार, पानो मुर्मू, विजय कुमार धर, मनोज कुमार व राधा कुमारी पारा शिक्षक के तौर पर पढ़ाते हैं।