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एनडीए में टिकट के जाेड़-ताेड़ से खत्म हुई थी दो दिग्गजों की बादशाहत, 37 साल बाद भाजपा के बागी ने लगाई थी सेंध

Bokaro News - गोमिया का चुनावी अतीत रोमांचक रहा है। इस क्षेत्र के राजनीतिक दिग्गजाें ने 37 सालों तक बारी-बारी राज किया। वर्ष 1977 से...

Nov 17, 2019, 06:21 AM IST
Bokaro News - in the nda the ticket had gone out of control after the death of two veterans after 37 years the bjp rebel had made a dent
गोमिया का चुनावी अतीत रोमांचक रहा है। इस क्षेत्र के राजनीतिक दिग्गजाें ने 37 सालों तक बारी-बारी राज किया। वर्ष 1977 से 2009 तक चार बार माधवलाल सिंह और चार बार छत्रुराम महतो विधायक रहे। 2014 में पहली बार योगेंद्र प्रसाद ने सेंध लगाई और यहां की बागडोर अपने हाथों में लिया। 2014 के चुनाव में एनडीए गठबंधन ने आजसू के दावेदार योगेंद्र प्रसाद का टिकट काटते हुए कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए माधवलाल सिंह को टिकट दे दिया। इससे नाराज होकर योगेंद्र प्रसाद ने झामुमो का दामन थाम लिया और चुनाव मैदान में उतर गए। परिणीति यह रही कि योगेंद्र ने निवर्तमान विधायक माधवलाल सिंह को करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही झामुमो के लिए यहां एक सीट की नई लकीर खींच दी। उल्लेखनीय है कि गोमिया सीट पर तीसरे चरण में 12 दिसंबर को चुनाव होना है।

एनडीए में गांठ के कारण योगेंद्र की प|ी 2018 का उपचुनाव जीती थीं

2014 में चुनाव जीतने के दो वर्ष बाद ही योगेंद्र प्रसाद पर कोयला चोरी का मामला सिद्ध हो गया। इस कारण उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। इस सजा के कारण योगेंद्र की विधायकी चली गई और 2018 में गोमिया सीट के लिए उपचुनाव हुआ। झामुमो ने उस समय पार्टी प्रत्याशी के रूप में योगेंद्र महतो की प|ी बबीता देवी को मैदान में उतार दिया। वहीं, एनडीए की ओर से आजसू प्रत्याशी डॉ. लंबोदर महतो को उतारा गया, लेकिन भाजपा ने पार्टी प्रत्याशी केे तौर पर माधवलाल सिंह को भी दोस्ताना संघर्ष के लिए चुनाव मैदान में उतार दिया। इसका पूरा फायदा झामुमो की बबीता को मिला और आजसू के लंबोदर उनसे मात्र 1341 वोट से पराजित हो गए।

इस बार भी दोहरा सकता है इतिहास

लंबोदर महतो

2014 चुनाव में मतदान% 69.64




निरसा
इस बार भी 2018 के उपचुनाव जैसे ही हालात हैं। आजसू से लंबोदर महतो मैदान में हैं। लेकिन एनडीए की आई दरार के कारण यदि गठबंधन धर्म का पालन नहीं हुआ तो भाजपा पार्टी प्रत्याशी के रूप में छत्रुराम महतो को दोस्ताना संघर्ष के लिए खड़ा कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा फायदा झामुमो को मिल सकता है। अभी इस सीट पर झामुमो और आजसू का सीधा मुकाबला है।

पिछले 2 चुनावों में झामुमो का रहा है वर्चस्व

वोटर्स बोले...इस बार मुकाबला अच्छा होगा

चटर्जी हमेश जनता के बीच रहे। लोगों को उनका व्यवहार पसंद है। बीजेपी से मुकाबला अच्छा होगा। मंजीत सिंह, ट्रांसपोर्टर

2018 उपचुनाव में मतदान% 62.61




बेरोजगारी बढ़ी है, उद्योगों की स्थिति ठीक नहीं है। पानी और बिजली संकट भी है। पप्पू साव, चिरकुंडा चैंबर आॅफ कामर्स।

माधवलाल सिंह

1977 से अब तक कब कौन किस दल से विधायक

वर्ष नाम दल

1977 छत्रुराम महतो जनसंघ

1980 छत्रुराम महतो भाजपा

1985 माधवलाल सिंह निर्दलीय

1990 माधवलाल सिंह निर्दलीय

1995 छत्रुराम महतो भाजपा

2000 माधवलाल सिंह निर्दलीय

2005 छत्रुराम महतो भाजपा

2009 माधवलाल सिंह कांग्रेस

2014 योगेंद्र प्रसाद महतो झामुमो

2018 (उपचुनाव) बबीता देव झामुमो

छत्रुराम महतो

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