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सेल में अावासाें काे फिर से लीज पर देने की याेजना काे लेकर मंथन शुरू
सेल में एक बार फिर अावासाें काे लीज पर देने की याेजना काे लेकर मंथन शुरू हाे गया है। दिल्ली में इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव के स्तर पर हुई बैठक में बाेकाराे, भिलाई, दुर्गापुर समेत अन्य इस्पात संयंत्राें के कर्मचारियाें के लिए बनाए गए अावासाें काे लीज पर देने के लिए सभी संयंत्राें से पहुंचे मुख्य महाप्रबंधक अाैर अधिशासी निदेशक स्तर के अधिकारियाें से उनकी राय पूछी गई। बताया जाता है कि अधिकारियाें ने केवल अावासाें काे ही नहीं बल्कि स्कूल भवन, सामुदायिक केंद्र, हेल्थ सेंटर के भवनाें काे भी लीज पर देने के लिए अपनी राय दी। अधिकारियाें ने कहा कि इससे सेल के घाटे में ताे कमी अाएगी ही। साथ ही सारे अावास अाैर दूसरे भवन भी बच जाएंगे। क्याेंकि अब सेल में कर्मचारियाें की संख्या अाधे से भी कम हाे गई है। ताे एेसे में अावासाें अाैर दूसरे भवनाें के रखरखाव पर ध्यान देना संभव नहीं हाे पा रहा है।
देखरेख के अभाव में जर्जर हाे रहे अावास
अधिकारियाें ने बताया कि पहले अावासाें अाैर दूसरे भवनाें की देखरेख के लिए न ताे पर्याप्त संख्या में अधिकारी हैं अाैर न ही कर्मचारी। एेसे में ये दिन-प्रतिदिन जर्जर हाे जाते रहे हैं। अानेवाले दिनाें में स्थिति एेसी हाे जाएगी कि ये पूरी तरह से ढह जाएंगे। एेसे में जब लीज पर इस्पात कर्मियाें काे ये अावास अाैर भवन दे दिए जाएंगे ताे ये बच जाएंगे अाैर सेल के पास अच्छी पूंजी भी खड़ी हाे जाएगी। मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा कि वे इस मसले पर इस्पात मंत्री से बात करेंगे।
इस्पात कर्मियाें के साथ-साथ प्राइवेट पार्टी काे भी दिए जाएंगे अावास
अधिकारियाें ने सचिव के समक्ष अपने सुझावाें काे रखते हुए कहा कि अावास अाैर भवन इस्पात कर्मियाें के साथ-साथ प्राइवेट पार्टी मसलन स्कूल, कालेज अाैर दूसरे संस्थानाें से जुड़े हुए लाेगाें काे भी दिए जाएं। इसमें ई-एफ टाइप, डी टाइप अावास पहले लीज पर दिए जाएंगे। सामुदायिक केंद्र, हेल्थ सेंटर, स्कूल भवन के लिए प्राइवेट पार्टियाें काे भी अामंत्रित किया जाएगा। अधिकारियाें के बाद अब यूनियनाें के नेताअाें से भी इस बारे में राय ली जाएगी। क्याेंकि सेल प्रबंधन अावासाें अाैर भवनाें के जर्जर हाेने काे लेकर काफी चिंतित है। यही नहीं खाली पड़े अावासाें में बहुत ज्यादा अतिक्रमण भी हाे रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए प्रबंधन काे अलग से मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसक झड़प हो चुकी है।