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सदियों से होली का पर्व नहीं मनाते हैं कसमार के दुर्गापुर गांव के लोग

एक वर्ष पहले
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होली रंगों का त्योहार है। होली के रंगों मे ही इस त्योहार की खुशियां समायी हैं। मगर कसमार के दुर्गापुर गांव में लाेग हाेली का त्याेहार नहीं मनाते हैं। यह अंधविश्वास अाज भी कायम है। लोगाें का मानना है कि होली खेलने से देवता नाराज हो जाएंगे और गांव मे अनिष्ट होगा। कसमार प्रखंड मुख्यालय से आठ किमी दूर स्थित दुर्गापुर गांव में लोग सदियों से होली नहीं खेलें हैं। लोगों का मानना है कि गांव के इष्टदेव बडराव बाबा को रंग और धूल पसंद नही है। होली खेलने पर बाबा नाराज हो जाते हैं और गांव मे अनिष्ट होने लगता है। ऐसा कई बार हुआ है। गांव में होली के दिन कोई उत्साह नहीं रहता है

बडराव बाबा धूल और रंग पसंद नहीं करते

ऐतिहासिक दुर्गा पहाड़ी की तलहटी में दुर्गापुर गांव बसा हुआ है। इस पहाड़ी को बडराव बाबा के नाम से पूजा व जाना जाता है। दुर्गापुर गांव के टोला डुंडाडीह निवासी 76 वर्षीय सुचांद महतो ने बताया कि केवल दुर्गापुर पंचायत ही नही, बल्कि यह पहाड़ी पूरे इलाके की आस्था का केंद्र है। इसके नाम पर पूजा होती है। मन्नत पूरी होने पर सफेद रंग का बकरा व मुर्गा चढ़ाया जाता है।

दुर्गा पहाड़ी के तलहटी मे बसा है दुर्गापुर गांव।
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