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राधानगर के बरूआडीह के दलित परिवाराें का आज तक नहीं बनाया गया राशन कार्ड

एक वर्ष पहले
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चास प्रखंड के राधानगर पंचायत के बरूआडीह टोले के दो दर्जन दलित परिवाराें को आज तक राशन कार्ड नहीं मिला है। जबकि इसके लिए कई बार ऑनलाइन आवेदन किया गया है। इन दलित परिवार के लोगों से दलाल आवेदन करने के नाम पर रुपए लेते हैं। इन परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनने वाले राशन कार्ड का इंतजार है। इस टोले में कुल तीन लोगों के पास ही राशन कार्ड है, जिन्हें हर माह राशन मिलता है। जबकि अन्य परिवार किसी तरह चावल खरीदकर जीवन-यापन करते हैं। इनके पास इतनी खेती भी नहीं कि सालभर खाने को उससे चावल का जुगाड़ हो जाए। यहां के लोग सिर्फ राशन कार्ड ही नहीं बल्कि सभी तरह की सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं, जो एक टोले के गरीब ग्रामीणों को मिलनी चाहिए। पूर्व में इनके पास लाल कार्ड था, लेकिन जब से खाद्य सुरक्षा अधिनियम आया, उसके बाद ये कार्ड निरस्त हो गए। वर्ष 2017 में करीब 15 परिवारों ने पंचायत में रहने वाले एक युवक की मदद से राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन फार्म भी भरा था, इसका सबूत इनके पास है। इसके बाद भी इन लोगों का राशन कार्ड नहीं बन सका।

आवेदन करने वाले ग्रामीणों को मिलेगा जल्द ही दे दिया जाएगा राशन कार्ड

बरुआडीह टोले के जिन ग्रामीणों ने राशन कार्ड के लिए पूर्व में आवेदन किया है। उनका राशन कार्ड बनाने की कार्रवाई एक-दो दिन में ही शुरु कर दी जाएगी। साथ ही जिन्होंने आवेदन नहीं किया है, उनका आवेदन ऑन लाइन कर, राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

एसएन पाठक, सहायक, जिला आपूिर्त पदाधकारी।

कार्ड नहीं रहने पर नहीं बन सका है आयुष्मान कार्ड

टोले में रहने वाले 30 परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं होने की वजह से इनका आयुष्मान कार्ड नहीं बन सका है। भोजन का जुगाड़ तो किसी तरह हो जाता है, लेकिन अगर कोई बीमार हो जाए, तो उन्हें जमीन तक गिरवी रखनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में ना तो जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं और ना ही कोई अधिकारी।

इनके पास नहीं है राशन कार्ड

35 परिवारों के इस टोले में नुपूर देवी, रातुली देवी, उषा देवी, विमला देवी, पनपती देवी, रतन कपरदार, नागेंद्र कपरदार, भागीरथ कपरदार, अरुण कपरदार, किष्टो कपरदार, दयाल कपरदार, हीरालाल कपरदार, अमूल्य कपरदार, अशोक कपरदार, दिलीप कपरदार, बादल कपरदार, उमा पद कपरदार, सुभाष कपरदार, रतन कपरदार, सावित्री देवी, उर्मिला देवी, संध्या देवी, निरूपा देवी, हेमलता देवी, शंकर कपरदार, उर्मिला देवी, मंजू देवी, गुड़िया देवी, कमला देवी, श्यामलाल सिंह और शकुंतला देवी के पास राशन कार्ड नहीं है।

किसी तरह कट रहा है जीवन

बरुआडीह टोले में रहने वाले रतन कपरदार की प|ी पनपती देवी कहती हैं कि उनके तीन बच्चे हैं। पति सुबह मजदूरी के लिए बोकारो शहर निकल जाते हैं। कमाकर आते हैं, तो राशन आता है। बच्चों को एक वक्त का भोजन स्कूल में ही मिलता है। सच पूछे तो खेती दो साल से हो नहीं रही है। इस टोले में रहनेवाले जो भी लोग हैं, वे किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं। इस टोले में रहने वाले किसी भी व्यक्ति के पास राशन कार्ड नहीं है, जबकि आस-पास के गांवों में जाएंगे तो हर घर-घर में लोगों के पास कार्ड बना हुआ है।

अपनी व्यथा बताते ग्रामीण।
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