राइट टू सर्विस एक्ट का नहीं होता है पालन, लोग रहते हैं परेशान

Bokaro News - जिले में राइट टू सर्विस एक्ट का अनुपालन नहीं होता है। एक काम के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। जबकि जिला...

Nov 11, 2019, 06:16 AM IST
जिले में राइट टू सर्विस एक्ट का अनुपालन नहीं होता है। एक काम के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। जबकि जिला प्रशासन के अधिकारी अथवा कर्मियों को समय पर आम जनता का काम पूरा कर देना है। वरना कर्मी को हर्जाना भरने का प्रावधान है। अधिकारी कभी नेट फेल तो कभी छुट्टी का बहाना बनाकर लोगों को टहलाते हैं। झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी नियमावली 2011 में यह प्रावधान है कि आम जनता का काम समय पर पूरा करना है। नियमावली में अधिकारियों के लिए समय-सीमा तय की गई है। उसी समय-सीमा में उन्हें आम लोगों को काम काम पूरा कर देना है। अगर वे समय पर काम पूरा नहीं करते हैं तो उन्हें हर्जाना देना होगा। इस नियमावली के बनने से लोगों को आज आओ, कल आओ कहकर टरकाने की बात अधिकारी नहीं कर सकते हैं। इस नियमावली के बाद भी अधिकारियों की मनमानी के कारण लोग परेशान रहते हैं। एक तो कर्मी समय पर कार्यालय पहुंचते नहीं है। कार्यालय बंद होने के पहले कर्मी घर चले जाते हैं।

क्या है सेवा गारंटी नियमावली

जिले में सेवा देने की गारंटी अधिनियम/ नियमावली 2011 (राइट टू सर्विस) बनाई गई है। यह अधिसूचना झारखंड सरकार ने जारी की है। झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम 15 नवंबर 2011 से लागू है। राज्य में उक्त अधिनियम को लागू हो जाने के फलस्वरूप विभिन्न सेवाओं का संपादन एवं प्रमाण पत्रों को निर्धारित समय सीमा के अंदर उपलब्ध कराया जाना है। इसके लागू होने के पश्चात निश्चित रूप से ऐसे प्रमाण पत्रों को निर्धारित समय सीमा के अंदर निष्पादित किया जाना है। जिले के वरीय अधिकारी ने सभी कनीय अधिकारियों को सरकार के तत्कालीन प्रधान सचिव आदित्य स्वरूप के पत्र का हवाला देकर सेवा देने की गारंटी अधिनियम की जानकारी देते हुए उसे अमल करने को कहा है।

करना है प्रचार-प्रसार

झारखंड राज्य सेवा गारंटी अधिनियम 2011 में राज्य के 20 विभाग के 54 सेवाओं को अधिनियम के अंतर्गत समय सीमा अधीन निस्तारण हेतु अधिसूचित किया गया है। ये सभी 54 सेवाएं पब्लिक से जुड़ी हैं। अधिकारियों ने इस अधिनियम का प्रचार-प्रसार सही तरीके से नहीं कराया। जिस कारण अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा अधिकतर सरकारी कार्यालय परिसर में इसका बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। जबकि नियमावली के अनुसार इसका प्रचार-प्रसार करना है। नियमावली के अनुसार सभी सरकारी कार्यालयों में सूचना पट्ट पर इसका प्रदर्शन करना है। ताकि आम लोग अपने कार्यों की समय-सीमा जान सके।

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