प्राचीन काल से रही है कोजागरा की परंपरा

Bokaro News - मिथिलांचल की सांस्कृतिक परंपरा अपने-आप में अनूठी है। यहां विवाह के बाद से लेकर साल भर तक पारम्परिक उत्सवों का चलन...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:20 AM IST
Bokaro News - the tradition of kojagara has been there since ancient times
मिथिलांचल की सांस्कृतिक परंपरा अपने-आप में अनूठी है। यहां विवाह के बाद से लेकर साल भर तक पारम्परिक उत्सवों का चलन रहा है। इन्हीं से एक है कोजागरा, जिसे मनाने की परम्परा मिथिलांचल में प्राचीन काल से ही कायम है। आश्विन पूर्णिमा के दिन कोजागरा उत्सव मनाने की परंपरा प्राचीन काल से रही है। इस दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है और रात्रि जागरण की प्रधानता है। विशेष रूप से नवविवाहित युवकों के यहां कोजागरा उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व में मधुर, पान और मखान का विशेष महत्व होता है। नवविवाहितों के घर पहली बार यह पूजा विशेष धूमधाम से की जाती है। इस वर्ष 13 अक्टूबर को कोजागरा पर्व मनाया जाएगा। कई जगह लक्ष्मी-प्रतिमाएं भी स्थापित की जाती हैं।

लड़की पक्ष से आते हैं मधुर, पान और मखान

कोजागरा नवविवाहितों के रागात्मक जीवन के शुरूआत का त्योहार है। शादी के पहले साल नवविवाहितों के घर लड़की पक्ष की ओर से मधुर, मखान, पान आदि आते हंै। वर पक्ष के लोगों के लिए वस्त्र भी देने की परंपरा है। संध्या में कोजागरा पूजन के बाद लोगों में मधुर, पान-मखान का वितरण किया जाता है। रात में जुआ (कौड़ी-पचीसी) और ताश खेलने की परंपरा भी रही है।

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