ग्रामीण क्षेत्र में हजारों पशु चेचक की चपेट में आए, सरकारी अस्पतालों में नहीं है दवा

Bokaro News - राजेश सिंह देव/ युधिष्ठिर महतो | बोकारो बोकारो जिले में इन दिनों हजारों पशु चेचक की चपेट में आ गए हैं। बीमारी में...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:20 AM IST
Bokaro News - thousands of animals are vulnerable to smallpox in rural areas there is no medicine in government hospitals
राजेश सिंह देव/ युधिष्ठिर महतो | बोकारो

बोकारो जिले में इन दिनों हजारों पशु चेचक की चपेट में आ गए हैं। बीमारी में पशु इतने कमजोर हो जाते हैं कि चलने में असमर्थ हो जाते हैं। दुधारू पशु बीमारी होने पर दूध देना तक बंद कर देते हैं। इस बीमारी का किसी सरकार पशु चिकित्सालय में न तो दवा है और ना ही वैक्सीन। इसके कारण पशुपालक परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप पशु चिकित्सक दवा देकर किसानों से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अगर दवाइयां होती, तो किसानों के पैसे खर्च नहीं होते। सरकारी पशु चिकित्सक इस मामले में अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि सरकार दवा उपलब्ध नहीं करवा रही है, तो वे क्या करें।

कई गांवों के किसानों ने बताया कि लगभग तीन महीने से यह बीमारी महामारी का रूप ले ली है। किसान रोज पशु चिकित्सक से इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का चक्कर काट कर रहे हैं, लेकिन कभी चिकित्सक नहीं मिलते, कभी मिले तो यह कहकर किसानों को वापस लौटा देते हैं कि उनके पास इस बीमारी के लिए कोई दवा नहीं है। इस बीमारी के इलाज के लिए जिले भर के किसी अस्पताल में दवा नहीं है। इसके कारण किसान मजबूरी में गांव के झोलाछाप चिकित्सकों के चक्कर में पड़कर पैसे खर्च कर रहे हैं।

चेचक पीड़ित बंधे मवेशी।

बीमारी के लक्षण : पशुओं के पूरे शरीर मे चेचक की तरह फफोले हो रहे हैं। उसके बाद 15-20 दिन तक फफोले रहने के बाद घाव बन जा रहे हैं। पशु के शरीर पर जहां फफोले हो रहे हैं वहां बड़ा सा छेद हो जाता है। यह बीमारी जानवरों के पैर से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाता है। मुंह और जीभ में होने के कारण जानवर चारा भी खा नहीं पाते हैं। इसके कारण पूरी तरह कमजोर हो जाते हैं। इसके बाद इतने कमजोर हो जाते हैं कि चलने में भी असमर्थ हो जाते हैं। गाय-भैंस दूध नहीं देते। बूढ़े जानवर कमजोर होकर मर जाते हैं।

चास प्रखंड के कई गांवों में फैली है यह बीमारी

चास प्रखंड के पिंड्राजोरा, भंडरो, कुरा, कोलबेंदी, बारपोखर, कुशमा, रामडीह, दुर्गापुर, लबुडीह, कांड्रा, काशीझरिया, उलगोड़ा , गोपालपुर, सरदाहा, टुपरा, पोखरना आदि गांवों में यह बीमारी फैली है।

क्या कहते हंै पशु चिकित्सक शक्ति पद महतो

ग्रामीण पशु चिकित्सक शक्ति पद महतो ने बताया कि लक्षण के अनुसार यह बीमारी चेचक जैसी है। कई गांवों में यह बीमारी फैली है। इसके इलाज के लिए दवा दे रहे हैं।

क्या कहते हैं ग्रामीण

विश्वनाथडीह निवासी जगदीश उरांव ने कहा कि उनके जानवरों को करीब एक महीने से यह बीमारी हुई है। सरकारी अस्पतालों में जाने पर दवा नहीं मिलती है। जानवरों के पूरे शरीर में बड़े-बड़े गड्‌ढे हो गए हैं। विश्वनाथडीह निवासी तुलसी उरांव ने कहा कि पशु पालन विभाग से जानवरों को वैक्सीन नहीं दिया गया है। वैक्सीन यदि देता, तो पशुओं में बीमारी नहीं फैलती। अस्पताल में जाने पर डॉक्टर भी नहीं मिलते हैं। केलियाडाबर निवासी रामपद महतो ने कहा कि दवा के लिए कई बार पशु चिकित्सक के पास गए, तो वे सीधे तौर पर हाथ खड़े कर देते हैं।

सरकारी अस्पतालों में दवा का अभाव

चास के प्रथमवर्गीय पशु चिकित्सक आलोक कुमार ने कहा कि यह बीमारी पूरे देश में है। अस्पतालों में दवा का अभाव है।

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