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कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ अखंड रामचरित मानस पाठ यज्ञ
गांधाजोड़ डेमुडीह में बजरंग बली मंदिर में कलश यात्रा के साथ अखंड रामचरित मानस पाठ यज्ञ की शुरूआत की गई। 13 मार्च को हेमंत दुबे की ओर से झांकी निकाली जाएगी। 15 को कतरास के सिंगर मणिकांत जागरण ग्रुप की ओर से जागरण का आयोजन किया जाएगा। 16 को कलश विसर्जन किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष कामता प्रसाद ठाकुर, सचिव विमल कुमार, कोषाध्यक्ष विकास कुमार महतो, अरूण राय, उपाध्यक्ष अबोध कुमार आदि लगे हुए हैं।
भक्ति पथ नहीं, बल्कि लक्ष्य अाैर इसे हमें हासिल करना है : आचार्य
ज्ञान अाैर कर्म मार्ग से ही मनुष्य भक्ति के मार्ग पर जाता है। यह कहना है वरीय आचार्य संपूर्णानंद अवधूत का। वे पुनदाग स्थित आनंद नगर में श्रद्धालुओं के समक्ष अपने प्रवचन में बोल रहे थे। इस मौके पर ब्रह्म मुहूर्त में गुरु सकाश, पांचजन्य एवं योगासन का अभ्यास भी आचार्य के निर्देशन में किया गया। संध्याकाल में सामूहिक धर्म चक्र व गुरु वंदना के बाद रावा की ओर से प्रभात संगीत पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया गया। प्रभात संगीत का एक नया घराना है, जिसे आनंद मार्ग के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार उर्फ आनंदमूर्ति जी ने दिया है। प्रथम दिन जीवन के लक्ष्य पर वरिष्ठ पुरोधा आचार्य संपूर्णानंद ने प्रवचन में कहा कि शास्त्रों में मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताए गए हैं - ज्ञान ,कर्म और भक्ति। उन्होंने कहा कि बाबा श्री श्री आनंदमूर्ति ने इसका खंडन करते हुए कहा कि भक्ति पथ नहीं है बल्कि भक्ति लक्ष्य है जिसे हमें प्राप्त करना है। बाबा कहते थे कि भक्ति मिल गई तो सब कुछ मिल गया। आदि गुरु शंकराचार्य के बारे में उन्होंने कहा कि वह उद्भट ज्ञानी थे। फिर भी भक्ति को श्रेष्ठ कहा है। उन्होंने मोक्ष प्राप्ति के उपाय एवं भक्ति को श्रेष्ठ बताया है। भक्ति आ जाने पर मोक्ष यूं ही प्राप्त हो जाता है, भक्त और मोक्ष में द्वंद्व होने पर भक्त की विजय होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति से हम भगवान को अपने वश में कर सकते हैं। कहा कि आज की भागदौड़ की जिंदगी में मानव नाना प्रकार की चिंताओं से ग्रस्त है। ऐसे में आनंदमार्ग ही उन्हें शांति की राह दिखा सकता है। आज पूरे विश्व में लोग आनंद मार्ग से जुड़कर अपना आध्यात्मिक कल्याण कर रहे हैं। संस्कृति को समझ रहे हैं। उनके भीतर पीड़ित मानवता की सेवा करने की भावना जागृत हो रही है। क्योंकि आनंद मार्ग पीड़ित मानवता की सेवा में आगे रहता है।
कलश यात्रा में शामिल महिलाएं।